मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद से लुढ़का कच्चा तेल! क्रूड ऑयल की कीमतों में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज

Crude Oil Prices: इजरायल और लेबनान में युद्धविराम की उम्मीद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। शेयर बाजार भी गिरे। तनाव कम होने से अब कूटनीतिक शांति की भारी उम्मीद है।
Crude Oil Prices: Middle East Ceasefire Hopes Reduce Tensions And Cool Global Equity Markets Today
क्रूड ऑयल (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Global Crude Oil Prices: इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू होने पर सहमति बनने से वैश्विक बाजार को राहत मिली है। इसके कारण गुरुवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस अहम शांति समझौते से ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को लेकर तनाव काफी कम होने की उम्मीद है। व्यापक कूटनीतिक समाधान की दिशा में यह एक बेहद सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.33 प्रतिशत गिरकर 96.50 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल भी 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर 94.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। पिछले कारोबारी सत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दोनों बेंचमार्क लगभग 2 प्रतिशत तक चढ़ गए थे। यह ताजा गिरावट बाजार और दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा और सुखद बदलाव लेकर आई है।

पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव

कुवैत पर ईरान के हालिया हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने पहले तेल की कीमतें तेजी से बढ़ा दी थीं। ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के डर से दुनिया भर के निवेशकों और खरीदारों में भारी चिंता का माहौल बन गया था। हालांकि, युद्धविराम की खबरों ने कच्चे तेल के खरीदारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी और बहुत ही जरूरी राहत प्रदान की है।

अमेरिकी नीति में अहम बदलाव

इस बीच अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली प्रतिनिधि सभा ने एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों को जारी रखने के अधिकार को सीमित करना है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद भी कहा है कि ईरान के साथ शांति बातचीत में बड़ी प्रगति इस सप्ताहांत तक सामने आ सकती है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि वॉशिंगटन के साथ संपर्क अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। दोनों देशों के राजनयिक लगातार बातचीत कर रहे हैं और एक-दूसरे के शांति प्रस्तावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक इस लंबी बातचीत से कोई बहुत ठोस या बड़ी प्रगति नहीं हुई है।

भारतीय बाजारों पर गहरा असर

वैश्विक बाजार के इस नकारात्मक रुख की तरह ही घरेलू भारतीय शेयर बाजारों में भी गुरुवार को काफी कमजोरी देखने को मिली। भारत के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगभग 0.5 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ खुले। भारतीय बाजार में विशेष रूप से आईटी, रियल्टी, फार्मा और हेल्थ सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

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