Pope Francis: 27 लाख रुपये महीने से ज्यादा की थी पोप फ्रांसिस की सैलरी, जानें अपने पीछे छोड़ गए कितनी संपत्ति
Pope Francis Death : पूरी दुनिया में ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरू के तौर पर जाने वाले पोप फ्रांसिस का आज 88 साल की उम्र में निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि पोप फ्रांसिस अपने पीछे काफी ज्यादा संपत्ति छोड़ गए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पोप फ्रांसिस (सौ. सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : ईसाई धर्मगुरू पोप फ्रांसिस का 88 साल की उम्र में देहांत हो गया है। इस खबर की पुष्टि वैटिकन सिटी की ओर से की जा चुकी है। हालांकि बताया जा रहा है कि वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। साथ ही उनका इलाज भी जारी था। कुछ समय पहले ही उन्होंने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ मुलाकात भी की थी। पोप फ्रांसिस कैथोलिक चर्च के हेड के रुप में पिछले कई सालों से कार्यरत थे। क्या आप भी ये जानना चाहते हैं कि पोप फ्रांसिस की सैलरी कितनी थी? साथ ही वो अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गए है?
पोप फ्रांसिस की सैलरी
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कैथोलिक चर्च के प्रमुख के तौर पर रहे पोप फ्रांसिस इसके हकदार होते हुए भी सैलरी नहीं लेते थे। पिछले पोपों के उलट, उन्होंने साल 2013 में पदभार ग्रहण करने के बाद चर्च से किसी भी प्रकार की सैलरी लेने से मना कर दिया था। हालांकि पोप को पारंपारिक तौर पर सैलरी मिलती है। एक रिपोर्ट बताती है कि इस पोस्ट के लिए करेंट सैलरी 32,000 डॉलर प्रति महीने है। लेकिन, पोप फ्रांसिस ने इस पैसे को चर्च में डोनेट करने, फाउंडेशन के लिए इसे यूज करने, ट्रस्ट में रखने या फैमिली के किसी सदस्य को देने का ऑप्शन चुना था।
पोप फ्रांसिस की नेटवर्थ
सैलरी नहीं लेने के बाद भी पोप फ्रांसिस के पास उनकी पोस्ट से जुड़ी कई परिसंपत्ति यानी असेट्स हैं, जो वो अपने पीछे छोड़कर जा चुके हैं। उन असेट्स की एक्सपेक्टेड वैल्यू तकरीबन 16 मिलियन डॉलर है। इन असेट्स में पोप फ्रांसिस की 5 कारें और उनकी पोस्ट से जुड़े कुछ अहम और विशेष लाभ भी शामिल हैं। हालांकि वे अपने हक की सैलरी नहीं लेते थे, लेकिन उसके बाद भी उनकी सैलरी का अमाउंट अभी भी टोटल प्रॉपर्टी में योगदान करती है।
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पोप फ्रांसिस का कार्यकाल
ईसाई धर्मगुरू पोप फ्रांसिस का जन्म अर्जेंटीना में जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो के तौर पर हुआ था। साल 2013 में पोप बेनेडिक्ट XVI के इस्तीफा देने के बाद इतिहास में पहले लैटिन अमेरिकन पोप बने। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्हें अपने जेसुइट वैल्यू के साथ एक नॉर्मल लाइफस्टाइल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता रहा है। वेटिकन ने साल 2001 में इस बात की आधिकारिक पुष्टि की थी कि पोप फ्रांसिस ने पोप बनने से पहले कभी भी चर्च की ओर से दी जाने वाली सैलरी स्वीकार नहीं की है। साथ ही दूसरी ओर कैथोलिक चर्च के पास एक इंस्टीट्यूट के तौर पर अपार प्रॉपर्टी है। चर्च के पास पूरी दुनिया भर में अहम असेट्स हैं, जो चर्च की वित्तीय मजबूती को मजबूत करने का काम करती है।
