Explainer: राजेश एक्सपोर्ट्स विवाद क्या है, SEBI ने क्यों लिया एक्शन; निवेशकों पर इसका क्या असर? जानें सबकुछ

Rajesh Exports Scam: इस पूरे मामले कि शुरुआत मार्च 2024 में एक शेयरहोल्डर की शिकायत से हुई थी, जिसने कंपनी के एकाउंटिंग में सालों से लंबित बड़े 'ट्रेड रिसीवेबल्स' पर चिंता जताई थी।
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राजेश एक्सपोर्ट्स स्कैम, (सोर्स- AI)
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Rajesh Exports Scam: देश की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी और ज्वेलरी कंपनियों में से एक राजेश एक्सपोर्ट्स फिलहाल सुर्खियों में है। दरअसल, मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने कंपनी और उसके चेयरमैन राजेश मेहता के खिलाफ एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक आंतरिक आदेश जारी किया है। कंपनी और प्रमोटर के खिलाफ कथित 15.15 लाख करोड़ रुपये की राजस्व (रेवेन्यू) बढ़ाकर दिखाने के मामले में सेबी ने यह कदम उठाया है।

जांच के बीच कार्रवाई किए जाने से कंपनी के निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे कंपनी में भरोसे का संकट पैदा हो सकता है। बाजार नियामक ने इस केस को कॉरपोरेट इतिहास का बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला बताया है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

राजेश एक्स्पोर्ट्स विवाद क्या है?

बता दें कि इस पूरे मामले कि शुरुआत मार्च 2024 में एक शेयरहोल्डर की शिकायत से हुई थी, जिसने कंपनी के एकाउंटिंग में सालों से लंबित बड़े 'ट्रेड रिसीवेबल्स' (यानी ग्राहकों से बकाया पैसा) पर चिंता जताई थी। इसके बाद सेबी ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 (5 साल) के बीच की अवधि के लिए फॉरेंसिक ऑडिट और औपचारिक जांच शुरू की। इस जांच में जो बातें सामने आईं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं।

1. 15.15 लाख करोड़ रुपये का फर्जी राजस्व: सेबी का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने पिछले 5 वर्षों में अपने कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का लगभग 97 प्रतिशत से 99.8 प्रतिशत हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर या फर्जी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

2. ओवरसीज सब्सिडियरीज का खेल: कंपनी ने दिखाया कि उसका 98 प्रतिशत से ज्यादा राजस्व भारत के बाहर की विदेशी कंपनियों (जैसे सिंगापुर और स्विट्जरलैंड की से आ रहा है। मार्केट रेग्युलेटर के मुताबिक, जब इन विदेशी सब्सिडियरीज के लेन-देन के डॉक्यूमेंटेड  सबूत मांगे गए, तो कंपनी कोई ठोस रिकॉर्ड या इनवॉइस नहीं दिखा पाई।

3. पर्सनल ट्रेडिंग को कंपनी का बिजनेस दिखाया: सेबी ने पाया कि प्रमोटर राजेश मेहता अपने पर्सनल अकाउंट से एक ब्रोकिंग फर्म (Affluence Shares & Stocks) के जरिए सोने के डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग कर रहे थे। उन्होंने अपने इस निजी घाटे/मुनाफे और लेन-देन को राजेश एक्सपोर्ट्स के कॉरपोरेट खातों में कंपनी की 'सेल और परचेज' 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद के रूप में दर्ज कर दिया।

4. फंड की हेराफेरी: बिना बोर्ड या ऑडिट कमिटी की मंजूरी के कंपनी के खातों से 339 करोड़ रुपये प्रमोटर राजेश मेहता के प्राइवेट अकाउंट में ट्रांसफर किए गए, जिसमें से केवल 232 करोड़ रुपये ही वापस आए।

कंपनी के खिलाफ सेबी ने क्यों लिया एक्शन?

सेक्यूरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के होल टाईम मेंबर कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने अपने 109 पन्नों के आदेश में इस गड़बड़ी को असाधारण और अनसुनी करार दिया है। सेबी ने निवेशकों के हितों की रक्षा और मार्केट रेगुलेशन बनाए रखने के लिए तुरंत ये कदम उठाए हैं।

ट्रेडिंग पर बैन: कंपनी के प्रमोटर और सीएमडी राजेश मेहता को अगले आदेश तक राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों या प्रतिभूतियों को खरीदने, बेचने या उनमें किसी भी तरह का लेन-देन करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

असहयोग का आरोप: जांच के दौरान कंपनी और उसके प्रमोटर्स ने सेबी और फॉरेंसिक ऑडिटर्स को अपने मुख्य अकाउंटिंग सिस्टम (ERP) और जर्नल डंप का एक्सेस नहीं दिया। समन भेजने के बावजूद जरूरी दस्तावेज नहीं सौंपे गए। कंपनी के वैधानिक ऑडिटर्स ने भी वर्किंग पेपर्स देने का वादा करके मुकर गए। सेबी के मुताबिक, यह असहयोग ही साबित करता है कि कंपनी कुछ छुपा रही है।

नया फॉरेंसिक ऑडिट: सेबी ने कंपनी के खातों और लेन-देन की और अधिक गहराई से जांच करने के लिए एक नए स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑपरेटर को नियुक्त करने का आदेश दिया है। साथ ही कंपनी को 30 दिनों के भीतर सभी लंबित जानकारी देने को कहा है।

 राजेश एक्सपोर्ट्स का क्या पक्ष है?

इस कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे कम्युनिकेशन गैप और भ्रम बताया है। उनका कहना है कि कंपनी द्वारा घोषित किया गया रेवेन्यू पूरी तरह सही है और इसमें कुछ भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया गया है। सेबी के अधिकारी शायद ग्रॉस प्रॉफिट और रेवेन्यू के बीच के अंतर को लेकर भ्रमित हो गए हैं। गोल्ड रिफाइनिंग बिजनेस का स्वरूप अलग होता है।

कंपनी ने आगे कहा कि एमसीएक्स (MCX) के साथ चल रहे एक विवाद के कारण कंपनी डिजिटल गोल्ड ट्रेड सीधे नहीं कर पा रही थी, इसलिए प्रमोटर के पर्सनल अकाउंट को सिर्फ एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया था, जो अंततः कंपनी के लिए ही था। कंपनी सेबी को सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज सौंपकर इस पूरे मामले को जल्द ही स्पष्ट कर देगी।

बाजार और निवेशकों पर असर?

इस खबर के आते ही शेयर बाजार में राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई और यह 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर आ गया। इस विवाद का असर केवल बड़े संस्थागत निवेशकों पर ही नहीं बल्कि आम लोगों पर भी पड़ रहा है, क्योंकि देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) के पास राजेश एक्सपोर्ट्स की करीब 10.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में LIC के माध्यम से करोड़ों पॉलिसीधारकों का पैसा भी इस कंपनी में अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।

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