वन नेशन, वन गैस ग्रिड: पूर्वी-मध्य भारत को बूस्टर डोज, अडानी LNG टर्मिनल से सप्लाई को मिलेगी मजबूती
Dhamra LNG Port: अडानी समूह ने ओडिशा के धामरा में 6,000 करोड़ से एलएनजी टर्मिनल बनाया। यह ‘वन नेशन, वन गैस ग्रिड’ को मजबूती देगा और पूर्वी व मध्य भारत में घर-घर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
- Written By: आकाश मसने
वन नेशन वन गैस ग्रिड प्रोजेक्ट (सोर्स: साेशल मीडिया)
One Nation One Gas Grid Project: स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा प्राप्त करने के लिये काफी प्रयास किये जा रहे हैं। ‘वन नेशन, वन गैस ग्रिड’ पहल के तहत कई क्षेत्रीय ग्रिड आपस में जुड़ेगे और देशभर में गैस की आपूर्ति को बढ़ावा देंगे। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों जैसे विभिन्न हितधारक इसके लिए प्रयासरत हैं।
अडानी समूह ने भी ओडिशा के भद्रक जिले में धामरा एलएनजी पोर्ट का निर्माण किया है। यह टर्मिनल मध्य और ईस्ट इंडिया के ग्रिडों को मजबूती प्रदान करेगा और घर-घर गैस आपूर्ति पहुंचाने की पहल को सुनिश्चित करेगा।
6,000 करोड़ का निवेश
एनएनजी टर्मिनल प्रमुख प्रदीप बंसल ने कहा कि ईस्ट और मध्य भारत में कई ग्रिड बनाये जा रहे हैं। इन ग्रिडों को एलएनजी उपलब्ध सुनिश्चित कराने में अडानी का टर्मिनल सबसे उपयुक्त साबित होगा। अडानी ने इस प्रोजेक्ट पर 6,000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं।
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सरकार ने प्राकृतिक गैस ग्रिड के तहत 34,500 किलोमीटर तक पाइपलाइन बिछाने की पहल की है। कई ग्रिड शुरू हो चुके हैं और कई ग्रिड का काम अंतिम चरण में हैं। मुंबई से नागपुर तक के ग्रिड का काम भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसका विस्तार रायपुर और झारसुगुड़ा तक होना है। भविष्य में झारसुगुड़ा में गैस देने का काम अडानी का एलएनजी प्रोजेक्ट कर सकता है। वर्तमान में इस टर्मिनल का पूरा उपयोग हो रहा है।
गैस इकोनॉमी की ओर बढ़ता कदम
इससे क्षेत्रीय असंतुलन (गैस की उपलब्धता और गैर-उपलब्धता वाले क्षेत्रों में) को दूर करने में मदद मिलेगी क्योंकि वर्तमान में प्राकृतिक गैस देश के कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित है। सरकार का यह सपना है कि देशभर में गैस आधारित इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जाए। इसमें यह महत्वपूर्ण कड़ी है। उद्योग के विकास के लिए भी यह काफी महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है।
ईस्ट का सबसे गहरा पोर्ट
धामरा पोर्ट कंपनी लिमिटेड (डीपीसीएल) के पोर्ट हेड देवेंद्र ठक्कर ने कहा कि ईस्ट इंडिया का सबसे गहराई वाला पोर्ट बनकर उभरा है। यही कारण है कि विश्व के बड़े-बड़े जहाज पोर्ट में आ रहे हैं। अल्प समय में ही कारोबार तेजी से बढ़ गया है। खासकर कोयला, मैंगनीज ओर की ढुलाई के मामले में अग्रणी स्थान हासिल कर लिया है। पोरबंदर और हल्दिया पोर्ट को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में आ गया है।
5 लाख मिलियन मीट्रिक टन से क्षमता 50 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। इसे 250 मिलियन मीट्रिक टन करने की योजना है। इसके लिए अलगे कुछ वर्षों में और 10,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना है।
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बंदरगाह का उपयोग पास के खनिज बेल्ट से लौह अयस्क के निर्यात के लिए किया जाएगा और यह नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और आसियान क्षेत्र सहित पूरे भू-राजनीतिक क्षेत्र के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।
कई देशों में कम समय में माल पहुंचाने और भेजने में सुगमता के कारण बंदरगाह को पसंद किया जा रहा है। सरकार के लाजिस्टिक कास्ट को कम करने में भी यह अहम भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर अडानी के प्रद्युम्न, शुभाशीष, राबिन घोष उपस्थित थे।
15 पोर्ट तक पहुंचा कारवा
ठक्कर ने बताया कि अडानी समूह का देशभर में 15 पोर्ट संचालित है। देश के कुल कारोबार में 27 फीसदी योगदान देने लगा है। कार्गो एक प्रमुख कारोबार के रूप में उभर रहा है। मुंद्रा पोर्ट देश के सबसे बड़े पोर्ट में से एक बनने को बेताब है और इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।
