नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
India’s Premier Aviation Gateway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का भव्य उद्घाटन किया है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के विकास में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है। 11,200 करोड़ रुपए की लागत से बना यह एयरपोर्ट न केवल यात्रा सुगम बनाएगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। जेवर में स्थित भारत का प्रमुख विमानन द्वार पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण को बनाने में कुल 11,200 करोड़ रुपए की बड़ी राशि खर्च की गई है। इस महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सफलतापूर्वक विकसित और संचालित किया जा रहा है। यह कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है जिसमें सरकार की भी भागीदारी है।
मार्च 2026 में नागर विमानन महानिदेशालय से एयरोड्रोम लाइसेंस मिलने के बाद यहां ऑल वेदर ऑपरेशन की सुविधा दी गई है। आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और रनवे लाइटिंग की मदद से कम दृश्यता में भी विमानों का आवागमन सुरक्षित रहेगा। यहां का 3,900 मीटर लंबा रनवे दुनिया के सबसे बड़े वाइड-बॉडी विमानों को आसानी से संभालने में सक्षम है।
शुरुआती चरण में इस एयरपोर्ट की सालाना क्षमता करीब 1.2 करोड़ यात्रियों को सेवा प्रदान करने की रखी गई है। भविष्य में इस क्षमता को बढ़ाकर 7 करोड़ यात्री प्रति वर्ष तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा यहां कार्गो हैंडलिंग की विशाल क्षमता भी है जो सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन माल संभाल सकेगी।
यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित यह एयरपोर्ट NCR का दूसरा प्रमुख सिविल एयरपोर्ट बनकर उभरा है जो एक गेटवे की तरह काम करेगा। इसे एक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां सड़क और रेल का अद्भुत मेल होगा। यात्री यहां से मेट्रो और अन्य परिवहन सेवाओं के माध्यम से आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
उत्तर प्रदेश अब देश का ऐसा गौरवशाली प्रदेश बन गया है जहां सर्वाधिक अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डे मौजूद हैं। प्रदेश में पहले से ही एक्सप्रेस-वे, मेट्रो और रैपिड-रेल जैसी आधुनिक सुविधाएं लोगों को निरंतर सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इनलैंड वाटर-वे और अब यह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट यूपी को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिला रहे हैं।
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यह एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा केंद्र होगा जहां इन-हाउस मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी MRO की सुविधा मिलेगी। इस तकनीक से विमानों की मरम्मत और देखरेख के लिए भारत की निर्भरता दूसरे देशों पर कम हो जाएगी। ILS सिस्टम और आधुनिक लाइटिंग की बदौलत रात के समय भी उड़ान संचालन पूरी तरह सुचारू रहेगा।