चाबहार बंदरगाह (फोटो-सोशल मीडिया)
Chabahar Port Project News: केंद्रीय बजट 2026-27 ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बार के बजट में ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चाबहार बंदरगाह’ परियोजना के लिए किसी भी धनराशि का आवंटन नहीं किया गया है। पिछले कई वर्षों से भारत इस महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजना पर सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च करता आ रहा था, लेकिन इस बार शून्य आवंटन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस कदम के पीछे मुख्य कारण अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंध बताए जा रहे हैं। पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए थे, हालांकि भारत को चाबहार परियोजना के लिए छह महीने की विशेष छूट दी गई थी। यह छूट आगामी 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत इस मुद्दे पर वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन बजट में फंड न होना यह संकेत देता है कि भारत फिलहाल सतर्क रुख अपना रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की धमकी दी है। इस आर्थिक दबाव के बाद भारत सरकार चाबहार परियोजना से जुड़े विभिन्न विकल्पों और जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन कर रही है। चाबहार को भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुँचने का एक वैकल्पिक मार्ग माना जाता है, जो पाकिस्तान को दरकिनार करता है।
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चाबहार बंदरगाह केवल भारत और ईरान के बीच का द्विपक्षीय मामला नहीं है, बल्कि यह ‘अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे’ (INSTC) का एक अभिन्न हिस्सा है। यह 7,200 किलोमीटर लंबी परियोजना रूस, आर्मेनिया, अजरबैजान और मध्य एशिया को जोड़ती है। भारत इस गलियारे के जरिए व्यापारिक लागत और समय कम करना चाहता है। बजट में फंड की कटौती से इस विशाल परिवहन नेटवर्क की गति धीमी होने की आशंका जताई जा रही है।