Budget 2026: निर्मला सीतारमण का कार्यकाल और इनकम टैक्स की नई परिभाषा; 2019 से 2025 तक का पूरा सफर

Budget 2026: वित्त मंत्री के रूप में पदभार संभालने के कुछ ही महीनों बाद, सितंबर 2019 में निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में भारी कटौती की थी।
Income Tax Reform in Nirmala Sitharamn tenure
निर्मला सीतारमण, (केंद्रीय वित्त मंत्री)
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Income Tax Reforms In Nirmala Sitharaman's Tenure: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल से लेकर वर्तमान तक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) व्यवस्था को सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। 2019 में कार्यभार संभालने के बाद से उनका मुख्य ध्यान 'टैक्स टेररिज्म' को खत्म करने और मध्यम वर्ग को वैकल्पिक राहत देने पर रहा है।

निर्मला सीतारमण के कार्यकाल का सबसे बड़ा बदलाव 2020 के बजट में आया, जब उन्होंने वैकल्पिक टैक्स सिस्टम (Section 115BAC) पेश की। टैक्सपेयर्स करदाताओं को निवेश के झंझट (जैसे LIC, PPF) से मुक्त कर कम टैक्स दरों का विकल्प देना। हालांकि, शुरुआत में इसे उतनी लोकप्रियता नहीं मिली क्योंकि इसमें पुरानी व्यवस्था की तरह कटौती (Deductions) उपलब्ध नहीं थी।

2023-2024: न्यू टैक्स रिजीम बना 'डिफ़ॉल्ट'

साल 2023 और 2024 के बजटों ने नई कर व्यवस्था की दिशा बदल दी। वित्त मंत्री ने इसे 'डिफ़ॉल्ट' चुनकर और स्लैब में बड़े बदलाव कर मध्यम वर्ग के लिए आकर्षक बनाया। टैक्स फ्री इनकम की सीमा ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹7 लाख (छूट के साथ) कर दी गई। नई व्यवस्था में भी ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन पेश किया गया, जो पहले केवल पुरानी व्यवस्था में था। सबसे अमीर भारतीयों के लिए उच्चतम सरचार्ज दर को 37% से घटाकर 25% कर दिया गया।

कॉर्पोरेट टैक्स में ऐतिहासिक कटौती (2019)

वित्त मंत्री के रूप में पदभार संभालने के कुछ ही महीनों बाद, सितंबर 2019 में निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में भारी कटौती की थी। बेस कॉर्पोरेट टैक्स को 30% से घटाकर 22% और नई विनिर्माण कंपनियों के लिए इसे 15% कर दिया गया। यह पिछले तीन दशकों का सबसे बड़ा कर सुधार माना गया।

फेसलेस असेसमेंट और पारदर्शिता

सीतारमण ने टैक्स विभाग और करदाता के बीच मानवीय हस्तक्षेप को खत्म करने के लिए फेसलेस असेसमेंट (Faceless Assessment) की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार को रोकना और असेसमेंट प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाना था। इसके साथ ही, 'विवाद से विश्वास' जैसी योजनाएं लाकर लंबित कर मुकदमों को सुलझाने पर जोर दिया गया।

आयकर स्लैब में बदलाव (न्यू रिजीम)

आय सीमा (₹) 2020 की दरें 2024-25 की दरें
0 - 3 लाख शून्य शून्य
3 - 6 लाख 5% 5%
6 - 9 लाख 10% 10%
9 - 12 लाख 15% 15%
12 - 15 लाख 20% 20%
15 लाख से ऊपर 30% 30%

(नोट: 2024 के बजट में ₹7 लाख तक की कुल आय पर 'रिबेट' के कारण कोई टैक्स नहीं देना पड़ता)

ITR फाइलिंग में तेजी और सरलीकरण

पिछले 6 वर्षों में इनकम टैक्स रिटर्न भरने की प्रक्रिया काफी तेज हुई है। पहले  रिफंड आने में महीनों लगते थे। अब तकनीकी सुधारों और नए ई-फाइलिंग पोर्टल के कारण रिफंड अब औसतन 10-15 दिनों में आ जाते हैं। बैंक ब्याज और डिविडेंड की जानकारी अब फॉर्म में पहले से भरी हुई आती है, जिससे गलतियों की गुंजाइश कम हुई है।

बजट 2026 से आम लोगों की उम्मीदें

2025 तक के बदलावों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में वित्त मंत्री पुरानी टैक्स व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म करने और नई व्यवस्था में ₹8 लाख तक की आय को पूरी तरह टैक्स फ्री करने का बड़ा दांव खेल सकती हैं। 2019 से 2025 का सफर 'जटिलता से सरलता' की ओर रहा है। जहां 2019 में टैक्स स्लैब उलझे हुए थे, वहीं 2025 तक भारत एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ गया है जहां करदाता के पास चुनाव की आजादी है और प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है।

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