Budget 2026: क्या आज बदलेगी आम आदमी की किस्मत? इन 3 आंकड़ों को देख झूम उठेंगे आप
Nirmala Sitharaman: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 9वें बजट को लेकर उम्मीद है कि यह विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम होगा। लेकिन क्या यह आम आदमी की किस्मत बदलने वाला साबित होगा?
- Written By: अर्पित शुक्ला
सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media)
Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को अपना 9वां बजट पेश करने वाली हैं। यह एनडीए सरकार का लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट होगा। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े पहले ही इस बजट की दिशा तय कर चुके हैं। यह बजट न केवल अगले एक साल के आर्थिक हालात को दर्शाएगा, बल्कि उम्मीद जताई जा रही है कि यह भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बजट आम आदमी की स्थिति में बदलाव ला पाएगा? आइए, डेटा और मौजूदा आर्थिक स्थिति के आधार पर समझते हैं।
7 साल में आधी हुई बेरोजगारी दर
भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि देश की विकास दर (GDP) स्थिर है और बेरोजगारी दर में गिरावट आई है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो बेरोजगारी दर में निरंतर सुधार हुआ है। 2017-18 में जहां यह दर 6 फीसदी थी, वहीं 2021-22 तक यह घटकर 3.1 फीसदी पर आ गई और पिछले दो सालों से यह दर 3.2 फीसदी पर स्थिर बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि आत्मनिर्भर भारत और अन्य सरकारी योजनाओं ने रोजगार के मोर्चे पर मजबूती दी है। आगामी बजट में उम्मीद है कि सरकार स्किल इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए नए प्रावधानों के जरिए इस दर को और घटाने की कोशिश करेगी।
बेरोजगारी दर
- 2017-18: 6%
- 2018-19: 5.8%
- 2019-20: 4.8%
- 2020-21: 4.2%
- 2021-22: 3.1%
- 2022-23: 3.2%
- 2023-24: 3.2%
GDP की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज
भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) में उतार-चढ़ाव तो रहा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। 2021-22 में 8.7% की शानदार जीडीपी ग्रोथ के बाद कुछ उतार-चढ़ाव आया, लेकिन 2023-24 में यह 8.2% रही। हालांकि, 2024-25 में इसके 6.5% रहने का अनुमान है, लेकिन 2025-26 में इसके फिर से 7.4% तक पहुंचने की उम्मीद है। यह रफ्तार आगामी बजट को आम आदमी के लिए फायदे का साबित कर सकती है।
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आर्थिक विकास दर (GDP)
- 2014-15: 7.4%
- 2015-16: 8%
- 2016-17: 8.26%
- 2017-18: 6.8%
- 2018-19: 6.53%
- 2019-20: 4.04%
- 2020-21: 7.96%
- 2021-22: 8.7%
- 2022-23: 7.2%
- 2023-24: 8.2%
- 2024-25: 6.5%
- 2025-26: 7.4% (अनुमान)
बढ़ रही आम आदमी की सालाना आय
आमदनी के मोर्चे से भी राहत की खबरें आई हैं। 2015-16 में जो प्रति व्यक्ति आय 94,797 रुपये थी, वह 2024-25 में बढ़कर 2 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इसका मतलब यह है कि पिछले 10 वर्षों में भारतीयों की औसत आय दोगुनी से भी अधिक हो गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वित्त मंत्री इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव या स्टैंडर्ड डिडक्शन में वृद्धि की घोषणा करेंगी या नहीं। अगर ऐसा होता है, तो मिडिल क्लास के हाथ में ज्यादा पैसा आ सकता है, जिससे खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी।
प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय (रुपये में)
- 2015-16: 94,797 रुपये
- 2016-17: 1.03 लाख रुपये
- 2017-18: 1.15 लाख रुपये
- 2018-19: 1.25 लाख रुपये
- 2019-20: 1.34 लाख रुपये
- 2020-21: 1.28 लाख रुपये
- 2021-22: 1.5 लाख रुपये
- 2022-23: 1.69 लाख रुपये
- 2023-24: 1.84 लाख रुपये
- 2024-25: 2 लाख रुपये
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आम बजट से बड़ी उम्मीदें
आगामी बजट से मिडिल क्लास को टैक्स राहत, उद्योगों के लिए निवेश प्रोत्साहन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में फोकस की उम्मीद की जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ओल्ड इनकम टैक्स रिजीम के कुछ लाभों को न्यू टैक्स रिजीम में शामिल कर सकती है, जिससे टैक्सपेयर्स को अधिक लाभ मिलेगा। इससे घरेलू मांग बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
