एसआईपी। इमेज-एआई
SIP Penalty Rules: आजकल हर निवेशक का पसंदीदा तरीका SIP है। इसमें छोटी रकम से भी बड़ा फंड बनाया जा सकता है। हालांकि, कई बार अचानक खर्च बढ़ने, बैंक में बैलेंस कम होने या ऑटो डेबिट में दिक्कत से SIP की किस्त मिस हो जाती है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि एक किस्त से क्या फर्क पड़ेगा। मगर, हकीकत ये है कि SIP मिस होना पूरे फाइनेंशियल प्लान को हिला सकता है। लगातार किस्तें मिस होने पर SIP कैंसिल भी हो सकती और बैंक अलग से पेनल्टी वसूल सकता है। ऐसे में समझना जरूरी है कि SIP मिस होने का असली असर क्या होता है। इससे कैसे बचा जा सकता है।
SIP मिस होने पर निवेश बंद नहीं होता, लेकिन लगातार 3 किस्तें मिस होने पर AMC आपकी SIP कैंसिल कर सकती हैं। SIP की एक किस्त मिस होने का नुकसानहै कि उस महीने नई यूनिट नहीं खरीद पाएंगे। मगर, इसका पुरानी यूनिट्स की खरीद पर असर नहीं होगा। अगली एसआईपी डेट से पहले आप अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस रखते हैं तो निवेश ऑटोमैटिक रूप से फिर चालू होगा। SIP की एक किस्त मिस हुई तो म्यूचुअल फंड कंपनी पेनल्टी नहीं वसूलेगी, लेकिन अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस न होने से बैंक पेनल्टी वसूल सकते हैं। ऐसे में बैंक 150 रुपए से 750 रुपए तक का चार्ज ले सकता है। ये चार्ज बैंक नियमों पर निर्भर करता है।
SIP की 1 किस्त मिस होने से भले एसआईपी कैंसिल न हो, लेकिन इससे फाइनेंशियल गोल्स पर असर जरूर पड़ सकता है। ऐसे में आप बाजार की चाल के हिसाब से रुपी कॉस्ट एवरेजिंग के मौके खो देते हैं। हर मिस हुई SIP से निवेशित राशि कम होती है, जो समय के साथ और आपके कॉर्पस की दिशा में कंपाउंडिंग की ताकत प्रभावित करती है। रुक-रुक कर निवेश करने से गोल टाइम पर पूरे नहीं होते। ऐसे में वित्तीय लक्ष्य पाने के लिए भविष्य में बड़ा निवेश करना पड़ सकता है।
सैलरी डेट के अगले दिन SIP डेट रखें। छोटी रकम से SIP शुरू करनी चाहिए। बड़ी SIP में परेशानी आ रही या हो सकती है तो छोटी 3-4 SIP चला सकते हैं। जरूरत पर SIP Pause ऑप्शन का इस्तेमाल करें। न्यूनतम बैलेंस से थोड़ा ज़्यादा पैसे रखें, ताकि SIP आराम से कटती रहे।
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लगातार 3 किस्तें मिस होने से एसआईपी कैंसिल कर दी जाती है तो भविष्य के ऑटो डेबिट फैसिलिटी बंद होगी। मगर, आपके द्वारा पहले से निवेश की गई म्यूचुअल फंड यूनिट्स में आपका पैसा लगा रहेगा। इन यूनिट्स का मूल्य फंड के प्रदर्शन के आधार पर घटता-बढ़ता रहेगा। कैंसिल एसआईपी को दोबारा शुरू कराना चाहते हैं तो ऐसा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए नए रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने से तमाम कागजी कार्यवाही फिर करनी पड़ सकती है।