Starlink को लेकर भारत में हलचलें फिर बढ़ीं, जानें किस दिन से शुरू हो रहा सैटेलाइट इंटरनेट
एलन मस्क की कंपनी SpaceX के साथ Starlink के लिए साझेदारी पर मार्च में Reliance Jio और फिर Airtel ने घोषणा की थी। लेकिन सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन के बिना यह संभव नहीं है। इसीलिए गोयल की यह बैठक काफी अहम है।
- Written By: सौरभ शर्मा
केन्द्रीय मंत्री पीयुष गोयल की स्टारलिंक के प्रतिनिधि मण्डल से मुलाकात (फोटो - पीयुष गोयल ट्विटर)
नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की दौड़ अब और रोमांचक हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में स्टारलिंक के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें कंपनी के भविष्य के निवेश योजनाओं और मौजूदा साझेदारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में स्टारलिंक के वाइस प्रेसिडेंट चैड गिब्स और सीनियर डायरेक्टर रयान गुडनाइट शामिल थे।
स्टारलिंक भारत में सेवाओं को गति देने को तैयार है, लेकिन सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन के बिना यह मुमकिन नहीं है। इसी वजह से गोयल की यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है, खासतौर पर तब जब भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत अपने अंतिम चरण में है।
Met a delegation from @Starlink, comprising of Vice President Chad Gibbs & Senior Director, Ryan Goodnight. Discussions covered Starlink’s cutting-edge technology platform, their existing partnerships & future investment plans in India. pic.twitter.com/mX66Y6Ltsn — Piyush Goyal (@PiyushGoyal) April 16, 2025
सम्बंधित ख़बरें
उत्तर मुंबई में विकास कार्यों को रफ्तार, पीयूष गोयल ने नाला सफाई और रोजगार केंद्रों की समीक्षा की
उत्तर मुंबई को उत्तम मुंबई बनाने का संकल्प, पीयूष गोयल ने नाला सफाई और अतिक्रमण पर दिखाए सख्त तेवर
इंटरनेट बंद तो क्या हुआ, बिना स्मार्टफोन भी कर सकते हैं UPI पेमेंट, जान लीजिए ये 3 जबरदस्त तरीके
Jio-Airtel-Vi यूजर्स के लिए बड़ी खबर, अब नेटवर्क और इंटरनेट शिकायतों पर तुरंत होगा एक्शन, TRAI ला रहा नया नियम
जियो और एयरटेल के साथ समझौता पर मामला स्पेकट्रम पर अटका
मार्च में रिलायंस जियो और फिर एयरटेल ने एलन मस्क की कंपनी SpaceX के साथ स्टारलिंक को लेकर साझेदारी की घोषणा की थी। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने स्टारलिंक की प्रतिस्पर्धी कंपनियों जियो सैटेलाइट और भारती समूह की यूटेलसैट वनवेब को पहले ही लाइसेंस दे रखा है, लेकिन अभी तक स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। स्टारलिंक जहां 6,750 से अधिक सैटेलाइट्स की मदद से विश्व की सबसे बड़ी सैटेलाइट कंस्टीलेशन चला रही है, वहीं यूटेलसैट वनवेब के पास लगभग 600 और जियो के साझेदारों के पास मात्र 70 सैटेलाइट हैं। यही कारण है कि स्टारलिंक को इस क्षेत्र का संभावित गेम-चेंजर माना जा रहा है।
बिजनेस की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें
ट्राई की सिफारिश के बाद रास्ता खुलने की उम्मीद
स्टारलिंक को भारत में परिचालन शुरू करने के लिए टेलीकॉम रेग्युलेटर ट्राई की स्पेक्ट्रम नीति पर सिफारिशों का इंतजार है। एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो सुरक्षा मंजूरी के बाद स्टारलिंक भारत में अपना विस्तार कर सकता है। हालांकि यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्टारलिंक भारत के डिजिटल भविष्य को नई दिशा दे पाएगा या फिर स्पेक्ट्रम विवाद इसे रोक देगा।
