हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले माइक्रोसॉफ्ट का एक्शन, शुरु की नायरा की सर्विसेज
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले ही माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने नायरा पर लगाए बैन को हटा दिया है। माइक्रोसॉफ्ट के एक प्रवक्ता ने भी नायरा की सर्विसेज शुरु करने की पुष्टि की।
- Written By: अपूर्वा नायक
नायरा एनर्जी (सौ. सोशल मीडिया )
Microsoft Restored Naira Service: माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन ने रूस की पेट्रोलियम कंपनी रोसनेफ्ट के द्वारा समर्थित नायरा एनर्जी की सर्विसेज को दोबारा शुरु कर दिया है। सूत्रों के द्वारा ये जानकारी मिली है।
दिल्ली हाईकोर्ट में निर्धारित सुनवाई से ठीक पहले यह फैसला किया गया है। माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन ने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद नायरा एनर्जी को सेवाएं देना बंद कर दिया था। इस पर भारतीय रिफाइनरी नायरा एनर्जी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ मुकदमा किया है जिस पर बुधवार को सुनवाई निर्धारित है।
क्या बोले माइक्रोसॉफ्ट के प्रवक्ता?
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया है कि सुनवाई से पहले, माइक्रोसॉफ्ट ने नायरा के लिए ईमेल, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और अन्य सर्विसेज तक पूर्ण पहुंच बहाल कर दी। माइक्रोसॉफ्ट के एक प्रवक्ता ने भी नायरा की सर्विसेज शुरु करने की पुष्टि की। प्रवक्ता ने कहा है कि माइक्रोसॉफ्ट भारत और दुनिया भर में अपने सभी ग्राहकों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने नायरा एनर्जी की सेवाएं बहाल कर दी हैं। हम संगठन के लिए सेवा निरंतरता सुनिश्चित करने को यूरोपीय संघ के साथ निरंतर चर्चा कर रहे हैं।
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नायरा ने क्या कहा?
नायरा ने माइक्रोसॉफ्ट के कदम को एकतरफा कार्रवाई करार देते हुए 28 जुलाई को बयान में कहा था कि नायरा एनर्जी ने महत्वपूर्ण सेवाओं के अचानक और एकतरफा निलंबन के बाद माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। माइक्रोसॉफ्ट नायरा एनर्जी की अपने डेटा, मालिकाना उपकरणों और उत्पादों तक पहुंच को रोक रही है जबकि ये पूरी तरह से भुगतान किए गए लाइसेंस के तहत हासिल किए गए हैं।
नायरा एनर्जी पर क्यों लगाया था बैन?
यूरोपीय संघ ने इस महीने की शुरुआत में यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ नए उपायों के अंतर्गत नायरा पर बैन लगाया था। रोसनेफ्ट की नायरा एनर्जी लिमिटेड, जिसे पहले एस्सार ऑयल लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, में 49.13 फीसदी हिस्सेदारी है। नायरा गुजरात के वडिनार में 2 करोड़ टन सालाना कैपेसिटी वाली एक तेल रिफाइनरी और 6,750 से ज्यादा पेट्रोल पंप को ऑपरेट करती है।
भारत के एनर्जी इकोसिस्टम पर इसका असर
नायरा ने कहा है कि माइक्रोसॉफ्ट का यह फैसला यूरोपीय संघ यानी ईयू के बैन की एकतरफा व्याख्या पर आधारित है और कॉरपोरेट अतिक्रमण के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। भारत के एनर्जी इकोसिस्टम पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं भी उत्पन्न होती हैं।
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कंपनी ने कहा था कि उसने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर अपने अधिकारों की रक्षा और आवश्यक डिजिटल बुनियादी ढांचे तक लगातार पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अंतरिम राहत देने और सेवाएं फिर से शुरू करने की अपील की है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
