Income Tax नियमों में बड़ा बदलाव, अब ITR फाइल करना होगा बच्चों का खेल! जानें फॉर्म की नई नंबरिंग का पूरा गणित

Income Tax: नई व्यवस्था से टैक्स से जुड़ी जानकारी को डिजिटल सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। इससे रीयल-टाइम डेटा मिलान और जांच में मदद मिलेगी।
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इनकम टैक्स, (कॉन्सेप्ट फोटो)
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Income Tax New Reform: इनकम टैक्स विभाग ने इनकम टैक्स नियमों का एक नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें टैक्स से जुड़े फॉर्म्स की नंबरिंग बदलने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य टैक्स देने वाले लोगों, टैक्स एक्सपर्ट्स और संस्थानों के लिए टैक्स से जुड़ी जानकारी भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है क्योंकि नया इनकम टैक्स एक्ट 2025, 1 अप्रैल से लागू होने वाला है।

इस ड्राफ्ट के साथ नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक इस्तेमाल हो रहे पुराने फॉर्म नंबर कई दशकों में बदलते-बदलते काफी जटिल हो गए थे। नई नंबरिंग से टैक्स फाइल करते समय होने वाली उलझन कम होगी और एक ही जानकारी बार-बार भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

नए टैक्स सिस्टम में क्या होगा खास?

नई व्यवस्था से टैक्स से जुड़ी जानकारी को डिजिटल सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। इससे रीयल-टाइम डेटा मिलान और जांच में मदद मिलेगी। हालांकि, इस बदलाव के कारण नियोक्ताओं, टैक्स सलाहकारों, रजिस्ट्रार और कंपनियों को अपने सिस्टम में जल्दी बदलाव करना होगा। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, कई ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय टैक्स फॉर्म्स को एक साथ जोड़ा गया है या उनका नंबर बदल दिया गया है। अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, जो पहले 3सीए, 3सीबी और 3सीडी फॉर्म में भरी जाती थी, वह अब एक ही फॉर्म 26 में दी जाएगी। इसी तरह, ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट अब फॉर्म 3सीईबी की जगह फॉर्म 48 में दी जाएगी। वहीं, मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) से जुड़ा सर्टिफिकेट अब फॉर्म 29बी की जगह फॉर्म 66 में जमा किया जाएगा। एमएटी 15 प्रतिशत का टैक्स होता है, जो उन कंपनियों पर लगाया जाता है जिनका सामान्य टैक्स उनकी बुक प्रॉफिट के 15 प्रतिशत से कम होता है।

टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट के लिए बदला फॉर्म

टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट के लिए भी फॉर्म बदल दिया गया है। अब इसके लिए फॉर्म 10एफए की जगह फॉर्म 42 का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा, दो देशों के बीच टैक्स समझौते यानी डीटीएए से जुड़ी जानकारी अब फॉर्म 10एफ की जगह फॉर्म 41 में देनी होगी। ड्राफ्ट में टीडीएस से जुड़े कई फॉर्म्स की नंबरिंग भी बदली गई है। अब कम या शून्य टीडीएस के लिए आवेदन फॉर्म 128 में किया जाएगा, जबकि सैलरी से जुड़ा टीडीएस सर्टिफिकेट अब फॉर्म 130 कहलाएगा। इसके साथ ही, टीडीएस रिटर्न के पुराने फॉर्म 24क्यू, 26क्यू और 27क्यू को भी नया नंबर दिया गया है। अब ये क्रमशः फॉर्म 138, फॉर्म 140 और फॉर्म 144 के नाम से जाने जाएंगे। वहीं, टीसीएस रिटर्न अब पुराने फॉर्म 27ईक्यू की जगह फॉर्म 143 में दाखिल की जाएगी।

फॉर्म 15सीबी की जगह अब फॉर्म 146

सालाना टैक्स स्टेटमेंट, जिसे आमतौर पर फॉर्म 26एएस कहा जाता है, अब फॉर्म 168 के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह, वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने वाला फॉर्म 61ए अब फॉर्म 165 हो जाएगा। इसके साथ ही विदेश भेजे जाने वाले पैसों से जुड़े फॉर्म्स में भी बदलाव किया गया है। अब विदेशी रेमिटेंस की जानकारी फॉर्म 15सीए की जगह फॉर्म 145 में दी जाएगी, जबकि चार्टर्ड अकाउंटेंट का सर्टिफिकेट फॉर्म 15सीबी की जगह फॉर्म 146 में जमा करना होगा।

नए आयकर व्यवस्था पर विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी बदलावों से इनकम टैक्स रिटर्न भरना ज्यादा आसान होगा। इससे आय और सुविधाओं की गणना साफ तरीके से हो सकेगी और टैक्स नियमों में एकरूपता आएगी, जिससे लोगों को टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलेगी।

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