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Economic Survey: पिज्जा, बर्गर के विज्ञापनों पर लगेगी रोक? आर्थिक सर्वे में मोटापे को लेकर कही गई बड़ी बात

Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण ने चेतावनी दी है कि भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे क्रॉनिक बीमारियों और स्वास्थ्य असमानताओं का खतरा बढ़ रहा है।

  • Written By: मनोज आर्या
Updated On: Jan 29, 2026 | 06:05 PM

(कॉन्सेप्ट फोटो)

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Junk Food In Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण ने भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) यानी जंक फूड की बढ़ती खपत को लेकर गंभीर चेतावनी दी है, खासकर बच्चों में मोटापे के तेजी से बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई है। लोकसभा में पेश प्री-बजट दस्तावेज के अनुसार भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते UPF बाजारों में शामिल हो चुका है, जिससे देश में मोटापा, डायबिटीज और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि सुबह से देर रात तक चलने वाले जंक फूड के विज्ञापनों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए, क्योंकि ये विज्ञापन बच्चों और युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। रिपोर्ट का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में भारत को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।

पांच वर्षों में 3.4% पहुंची वजन की समस्या

  • सर्वेक्षण के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन की समस्या 2015-16 में 2.1% थी, जो 2019-21 में बढ़कर 3.4%  हो गई।
  • अनुमान है कि 2020 में भारत में करीब 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे, जो 2035 तक बढ़कर 8.3 करोड़ हो सकते हैं।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 24% महिलाएं और 23% पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आते हैं।
  • वहीं 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में 6.4 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि पुरुषों में 4 प्रतिशत अधिक वजन की समस्या पाई गई है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर नियंत्रण के सुझाए

  • इनमें हाई फैट, शुगर और नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों पर चेतावनी के साथ फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग, बच्चों को लक्षित विज्ञापनों पर रोक, और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को कमजोर न करने वाले व्यापार समझौते शामिल हैं।
  • सर्वेक्षण ने यह भी कहा कि सिर्फ उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव से स्वस्थ खानपान संभव नहीं है, बल्कि खाद्य प्रणाली से जुड़े समन्वित नीतिगत सुधार जरूरी हैं। इसमें यूपीएफ उत्पादन का नियमन, स्वस्थ आहार को बढ़ावा और जिम्मेदार मार्केटिंग शामिल है।
  • सर्वेक्षण के अनुसार, सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक सभी मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूपीएफ के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प भी तलाशा जा सकता है। साथ ही डिजिटल मीडिया और बच्चों के लिए दूध व पेय पदार्थों के प्रचार पर भी सख्ती की सिफारिश की गई है।

इन देशों में जंक फूड विज्ञापन पर प्रतिबंद

आर्थिक सर्वेक्षण ने चिली, नॉर्वे और ब्रिटेन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लागू है। हाल ही में ब्रिटेन ने बच्चों पर प्रभाव कम करने के लिए रात 9 बजे से पहले जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगाई है।

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मौजूदा नियमों की कमजोरियों पर सवाल

सर्वेक्षण ने मौजूदा नियमों की कमजोरियों पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि विज्ञापन कोड और सीसीपीए दिशानिर्देशों में पोषण आधारित स्पष्ट मानक नहीं हैं, जिससे कंपनियां स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे दावे करके नियमों से बच निकलती हैं।

भारत में यूपीएफ के कारोबार के आंकड़े

आर्थिक सर्वेक्षण ने चेतावनी दी है कि भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे क्रॉनिक बीमारियों और स्वास्थ्य असमानताओं का खतरा बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यूपीएफ की बिक्री 2009 से 2023 के बीच 150 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। वहीं 2006 में 0.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2019 में करीब 38 अरब डॉलर तक पहुंच गई, यानी लगभग 40 गुना वृद्धि। इसी अवधि में पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापा लगभग दोगुना हो गया है।

यह भी पढ़ें:Budget 2026: बूम कर रही गिग इकोनॉमी…फिर क्यों घट रही कमाई? आर्थिक सर्वे में हुआ होश उड़ाने वाला खुलासा

मल्टीलेवल पॉलिसी अपनाने की जरूरत

आर्थिक सर्वेक्षण ने जंक फूड की बढ़ती खपत से निपटने के लिए मल्टीलेवल पॉलिसी अपनाने की जरूरत बताई है, ताकि देश में बढ़ते मोटापे और लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारियों पर प्रभावी रूप से नियंत्रण किया जा सके।

Junk food advertisements to be banned economic survey reveals concern

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Published On: Jan 29, 2026 | 06:05 PM

Topics:  

  • Budget 2026
  • Business News
  • Economic Survey

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