हवाई सफर पर ईरान-इजराइल तनाव की मार, भारतीय एयरलाइंस ने 15% बढ़ाया किराया; जानें किन रूट्स पर सबसे ज्यादा असर
Flight Fare Hike: 28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के बाद से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
- Written By: मनोज आर्या
एयर इंडिया, (सोर्स- सोशल मीडिया)
International Flight Fare Hike: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है।
भारत समेत एशिया और दुनियाभर की प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं और कई कंपनियां अपने विमानों को ग्राउंडेड करने का प्लान भी बना रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट हो सकता है।
भविष्य में और बढ़ सकता है किराया
रिपोर्ट के अनुसार, जेट फ्यूल यानी ATF की कीमतों में हो रहे इजाफे को देखते हुए भारत की एविएशन कंपनियां आने वाले दिनों में किराया और भी बढ़ा सकती हैं। एयरलाइंस का कहना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है।
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दोगुना हुई जेट फ्यूल की कीमतें
28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के बाद से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी।
40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल
वहीं कई मार्केट में जेट फ्यूल की कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो चुकी हैं। जंग से पहले जेट फ्यूल की कीमतें लगभग 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। वहीं मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण दुनियाभर में अब तक 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल भी हुई हैं।
जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनिया भर की एयरलाइंस ने न केवल टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस ले लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है।
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तेल की कीमतों में आए इस अचानक बदलाव ने एयरलाइंस के बजट को बिगाड़ दिया है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी बड़ी कंपनियों ने भी साफ कर दिया है कि वे बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे।
