6.5% की रेट से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था, महंगाई में भी आएगी गिरावट; क्रिसिल का दावा
India's GDP Growth: रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य से बेहतर मानसून, इनकम टैक्स में राहत और आरबीआई एमपीसी की ब्याज दरों में कटौती से घरेलू खपत में सुधार से विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
- Written By: मनोज आर्या
प्रतीकात्मक तस्वीर
India GDP Growth Rate: रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें कहा गया है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) चालू वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की दर से ग्रोथ कर सकता है। इसकी वजह घरेलू खपत में सुधार होना और अन्य संकेतों का सकारात्मक होना है।क्रिसिल इंटेलिजेंस के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के लिए सबसे बड़ा जोखिम अमेरिकी टैरिफ के कारण पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि हालांकि, सामान्य से बेहतर मानसून, इनकम टैक्स में राहत और आरबीआई एमपीसी की ब्याज दरों में कटौती से घरेलू खपत में सुधार से विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर सालाना आधार पर 7.4 प्रतिशत रही, जो इससे पिछली तिमाही में 6.4 प्रतिशत थी। इससे पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही।
जून में घटी महंगाई दर
रिपोर्ट में कहा गया कि खाने-पीने चीजों में महंगाई के नकारात्मक होने के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति जून में घटकर 2.1 प्रतिशत रह गई, जो 77 महीनों में सबसे कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, हंगाई के रुझान, सामान्य से बेहतर मानसून की भविष्यवाणी और वैश्विक स्तर पर तेल व कमोडिटी की कीमतों में नरमी की उम्मीद के आधार पर, हमारा अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में सीपीआई महंगाई औसतन 4 प्रतिशत रह जाएगी, जो पिछले वित्त वर्ष में 4.6 प्रतिशत थी।
सम्बंधित ख़बरें
Gold-Silver Rate Today: मजबूत डॉलर के आगे बेदम हुआ सोना-चांदी, एक झटके में 11,700 रुपये तक घटे रेट
आम आदमी की जेब पर दोहरी मार! कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, अप्रैल में 8.3% पहुंची थोक महंगाई
Explainer: आजादी से अब तक…कैसे ₹3 से ₹95 तक पहुंचा डॉलर का सफर, जानें कब-कब और क्यों गिरा हमारा रुपया?
Gold-Silver Rate Today: सोने-चांदी की चमक पड़ी फीकी! बंपर उछाल के बाद कीमतों में गिरावट, जानें क्यों बदला रुख?
रेपो रेट में कटौती के अनुमान
रिपोर्ट में कहा गया कि इस वित्त वर्ष में आरबीआई की रेपो दर में एक और कटौती और उसके बाद एक ठहराव की उम्मीद है। इस वित्त वर्ष में सकल बाजार उधारी 14.8 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में 5.8 प्रतिशत अधिक है। सरकार की योजना वित्त वर्ष की पहली छमाही में बजटीय उधारी का 54 प्रतिशत पूरा करने की है।
ये भी पढ़ें: सोने की कीमतों में तेजी, चांदी की चमक भी बरकरार; देखें देश के टॉप शहरों का भाव
मई में राजकोषीय घाटा
मई तक राजकोषीय घाटा इस वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का 0.8 प्रतिशत रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 3.1 प्रतिशत से कम है। यह वृद्धि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अधिक राजस्व प्राप्तियों और कम राजस्व व्यय के कारण हुई है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि चालू खाता घाटा (सीएडी) इस वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद का औसतन 1.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 0.6 प्रतिशत था।
एजेंसी इनपुट के साथ-
