केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Piyush Goyal On India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात बन चुकी है। इसे लेकर फ्रेमवर्क भी जारी किया जा चुका है, लेकिन बड़ा सवाल ये कि आखिर कब से ये लागू होगी? तो इसे लेकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने शुक्रवार को बताया कि भारत-US के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर मार्च में साइन होने की संभावना है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच इस डील के लीगल अंतरिम व्यापार समझौते के लीगल ड्राफ्ट को अंतिम रूप जल्द दिया जाएगा। इसके लिए इसी महीने 23 फरवरी से US में तीन दिवसीय बैठक होने वाली है।
ये अपडेट दोनों देशों की और से इस डील को लेकर फ्रेमवर्क और फैक्टशीट शेयर किए जाने के बार सामने आया है। केंद्रीय मंत्री ने इसे लेकर कहा कि मार्च में India-US Trade Deal पर साइन होने के बाद इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ये बड़ा अपडेट देने के सा ही बताया कि भारत का ब्रिटेन और ओमान के साथ में मुक्त व्यापार समझौता भी अप्रैल में ही लागू होने की उम्मीद है. इसके अलावा न्यूजीलैंड के साथ ही भारत की डील पर बात करते हुए पीयूष गोयल ने बताया कि ये India-New Zealand FTA इस साल सितंबर महीने में लागू किया जा सकता है।
न सिर्फ पीयूष गोयल, बल्कि भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर की ओर से भी India-US Trade Deal को लेकर खुशखबरी दी गई है। बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा करते हुए इसे लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बनने की बात कही थी। अब उनके राजदूत गोर ने भी इशारा किया कि जल्द दोनों देश डील साइन कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें: भारतीय अर्थव्यवस्था की ऐतिहासिक छलांग, विदेशी मुद्रा भंडार 725 अरब डॉलर के पार; दुनिया में बढ़ा भारत का दबदबा
अमेरिका के साथ भारत की डील को लेकर बीते दिनों आई एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट विस्तार से बताया गया था और ये देश के लिए बड़ा फायदा पहुंचने वाली डील है। इससे अनुमानित सालाना आधार पर भारत का निर्यात 100 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ सकता है, तो वहीं ट्रेड डील से जीडीपी में भी उछाल आएगा। SBI का अनुमान है कि ये इंडिया जीडीपी में करीब 1.1% की वृद्धि करेगी और साथ ही आयात शुल्क में कमी के कारण सालाना लगभग 3 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचत भी होगी।