भारत-स्विट्जरलैंड आर्थिक साझेदारी होगी मजबूत! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और गाय पार्मेलिन की अहम बैठक

India-Switzerland Meeting: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से मुलाकात की। दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।
Nirmala Sitharaman And wiss President Guy Parmelin
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से मुलाकात कीसोर्स- IANS
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Jitendra Singh Swiss President Guy Parmelin: भारत और स्विट्जरलैंड ने द्विपक्षीय आर्थिक, व्यापारिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प जताया है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को जल्द अंतिम रूप देने और निवेश प्रवाह को गति देने के रणनीतिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

इससे पूर्व, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और स्विस राष्ट्रपति के बीच हुई बैठक में स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 45 मिलियन स्विस फ्रैंक (CHF) के अतिरिक्त फंड की घोषणा की। इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च, ब्लू इकोनॉमी और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों में दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।

निवेश संधि को लेकर क्या हुई बात?

वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच भारत और स्विट्जरलैंड के साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में विशेष रूप से द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर जारी बातचीत को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। दोनों देशों का मानना है कि इस समझौते से निवेश प्रवाह बढ़ेगा और आर्थिक साझेदारी को नई गति मिलेगी।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर सहयोग की सहमति

इससे पहले, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों पक्षों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में लंबे समय से जारी सहयोग को अधिक संरचित और दीर्घकालिक स्वरूप देने पर सहमति जताई।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने क्या कहा?

बैठक में उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को रणनीतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से अंतरविषयक और मिशन मोड दृष्टिकोण अपना रहा है। उन्होंने बताया कि कई राष्ट्रीय कार्यक्रम विभिन्न मंत्रालयों और विषयों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर संचालित किए जा रहे हैं।

AI का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को भारत एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक के रूप में देख रहा है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनेक क्षेत्रों में बदलाव ला सकती है।

इसके अलावा उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, वैक्सीन विकास, जीनोम सीक्वेंसिंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और गहरे समुद्री अनुसंधान में भारत की प्रगति की जानकारी भी साझा की।

ब्लू और बायो-इकोनॉमी पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान ब्लू इकोनॉमी और बायो-इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना चाहता है।

उन्होंने इंडो-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क (आईएसआरएफ) और इंडो-स्विस जॉइंट साइंटिफिक बोर्ड की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक आधार मिलेगा।

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शिक्षा के क्षेत्र में साझेदार बनना चाहता है स्विट्जरलैंड

वहीं, स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत को तेजी से उभरती हुई वैश्विक अनुसंधान एवं विकास शक्ति के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि उनका देश शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्रों में भारत का दीर्घकालिक साझेदार बनना चाहता है।

उन्होंने बताया कि स्विट्जरलैंड ने इस साझेदारी को और मजबूत करने के लिए 45 मिलियन स्विस फ्रैंक (सीएचएफ) की अतिरिक्त राशि निर्धारित की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत भी इसी प्रकार की प्रतिबद्धता दिखाएगा, जिससे दोनों देशों के संयुक्त अनुसंधान ढांचे को और मजबूती मिल सकेगी।

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