Budget 2026: व्यापारियों की मांग, दवाओं और सोने पर घटे GST और डॉक्टरों की फीस हो तय
GST Rate Reduction: व्यापारियों ने बजट 2026-27 में दवाओं पर प्राइस कैपिंग, सोने पर GST कटौती और शिक्षा पर कर राहत की मांग की है ताकि आम जनता को महंगाई से राहत मिल सके और स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हों।
- Written By: प्रिया सिंह
Budget 2026 में व्यापारियों की मांग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Union Budget GST Relief: आम बजट 2026-2027 के आने से पहले विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारियों ने सरकार के सामने अपनी महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। केंद्रीय बजट GST को लेकर व्यापारियों का मानना है कि दवाओं और सोने की कीमतों में कमी लाना अनिवार्य है। स्वास्थ्य और व्यापार जगत के विशेषज्ञों ने करों में सुधार की पुरजोर वकालत की है ताकि अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। इन सुझावों का मुख्य उद्देश्य आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करना और सेवाओं को सुलभ बनाना है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
मेडिसिन ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च पर नियंत्रण हेतु स्पष्ट सीमा तय करने का आग्रह किया है। उनके अनुसार बाजार में दवाओं की कीमतों में भारी अंतर है, जहां 8 रुपए की दवा खुले बाजार में 150 रुपए तक में बिक रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर दवा पर प्राइस कैपिंग की जाए और डॉक्टरों की फीस उनकी डिग्री के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए।
सोने और चांदी पर राहत
सर्राफा व्यापारियों ने स्वर्ण आभूषणों की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की है और सरकार से आगामी बजट में विशेष राहत की उम्मीद जताई है। उदय सोनी ने मांग की है कि वर्तमान में सोने और चांदी पर लगने वाले 3 प्रतिशत GST को घटाकर 2 प्रतिशत या आधा किया जाए। उनका कहना है कि सर्राफा उद्योग लेबर पर निर्भर है, इसलिए कारीगरों की मजदूरी पर लगने वाला GST पूरी तरह समाप्त होना चाहिए।
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महंगाई का बढ़ता असर
व्यापारी मेहताब आलम ने कहा कि बढ़ती महंगाई की वजह से आज के समय में गरीब व्यक्ति के लिए सोना खरीदना एक सपने जैसा हो गया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पहले एक लाख रुपए में शादियां संपन्न हो जाती थीं, लेकिन अब इतनी राशि में एक तोला सोना मिलना भी कठिन है। उन्होंने बजट में सोने के साथ-साथ घर बनाने की सामग्रियों पर भी GST की दरें कम करने की जोरदार वकालत की है।
शिक्षा और कर नीति
ट्रेडर नवाब कुरैशी ने सरकार की वर्तमान कर नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि जनता पहले से ही भीषण महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रही है। उन्होंने बताया कि शिक्षा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जा रहा है, जो आम आदमी की शिक्षा तक पहुंच पर एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है। कुरैशी के अनुसार नोटबुक और पेंसिल पर टैक्स घटाने के दावों के बावजूद धरातल पर जनता को कोई वास्तविक राहत नहीं मिली है।
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भ्रष्टाचार और विसंगतियां
स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर भी व्यापारियों ने गंभीर चिंता जताई है और प्रशासनिक स्तर पर सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। उनका मानना है कि जब तक विभागीय भ्रष्टाचार और विसंगतियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक सरकारी योजनाओं के लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचेंगे। यह बजट व्यापारियों और आम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए ताकि देश का समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
Frequently Asked Questions
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Que: दवाओं की कीमतों को लेकर व्यापारियों की प्रमुख मांग क्या है?
Ans: व्यापारियों ने मांग की है कि दवाओं पर प्राइस कैपिंग की जाए, क्योंकि 8 रुपए वाली दवा बाजार में 150 रुपए तक बिक रही है।
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Que: सोने और चांदी पर वर्तमान में कितना GST लगता है और कितनी कटौती की मांग है?
Ans: वर्तमान में 3 प्रतिशत GST लगता है, जिसे व्यापारियों ने घटाकर 2 प्रतिशत या उससे भी कम करने की मांग की है।
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Que: डॉक्टरों की फीस को लेकर क्या सुझाव दिया गया है?
Ans: सुझाव दिया गया है कि डॉक्टरों की फीस उनकी डिग्री के अनुसार सरकार द्वारा तय की जानी चाहिए ताकि लूट बंद हो।
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Que: शिक्षा क्षेत्र में GST को लेकर क्या विवाद है?
Ans: व्यापारियों का आरोप है कि शिक्षा पर 18 प्रतिशत GST लगाया जा रहा है, जबकि स्टेशनरी पर राहत के दावे किए जाते हैं।
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Que: सर्राफा व्यापारियों ने कारीगरों के लिए क्या रियायत मांगी है?
Ans: उन्होंने मांग की है कि आभूषण बनाने वाले कारीगरों की लेबर (मजदूरी) पर लगने वाले GST को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
