Energy Crisis से निपटने के लिए IEA की सलाह, वर्क फ्रॉम होम से लेकर हवाई यात्रा में कटौती तक के सुझाव
Energy Mitigation Strategy: ऊर्जा संकट के असर को कम करने के लिए IEA ने वर्क फ्रॉम होम, हवाई यात्रा में कमी और आधुनिक कुकिंग अपनाने जैसे कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं ताकि ईंधन की खपत घटाई जा सके।
- Written By: प्रिया सिंह
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए IEA की सलाह (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global Energy Crisis Mitigation Steps: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। IEA ने चेतावनी दी है कि वर्तमान युद्ध वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आपूर्ति संकट पैदा कर रहा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सरकारों और नागरिकों को मिलकर ईंधन की मांग कम करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।
ईंधन खपत घटाने के उपाय
IEA ने सुझाव दिया है कि जहां भी संभव हो लोगों को घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनानी चाहिए। इससे कार्यालय आने-जाने में होने वाले ईंधन की भारी खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह विशेष रूप से उन नौकरियों के लिए प्रभावी होगा जहां रिमोट काम पूरी तरह से संभव है।
परिवहन में बदलाव की जरूरत
सड़क परिवहन के क्षेत्र में ईंधन बचाने के लिए हाइवे पर वाहनों की गति कम करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है। निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और शहरों में गाड़ियों पर नियंत्रण लगाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा कार शेयरिंग और माल ढुलाई में दक्षता बढ़ाकर भी बड़ी बचत की जा सकती है।
सम्बंधित ख़बरें
New Labour Code 2026: कर्मचारियों के लिए बड़े बदलाव, सैलरी, छुट्टी, ग्रेच्युटी और महिलाओं के कामकाज पर असर
डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने का तरीका: गुमनाम रहकर भी कर सकते हैं लीगल एक्शन, जानें कैसे और कहां?
मॉर्गन स्टेनली ने की बड़ी भविष्यवाणी, परमाणु ऊर्जा बनेगा भारत का ‘गेम चेंजर’, 2047 तक के लिए तैयार है प्लान
ऑफिस में गलत व्यवहार पर महिलाएं कहां करें शिकायत, जानिए क्या है She-Box पोर्टल
हवाई यात्रा और आधुनिक कुकिंग
रिपोर्ट के अनुसार जेट फ्यूल की मांग घटाने के लिए जहां विकल्प मौजूद हों वहां हवाई यात्रा से बचना चाहिए। घरेलू मोर्चे पर एलपीजी की निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक जैसे आधुनिक कुकिंग विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया गया है। गैस का उपयोग केवल खाना बनाने जैसे बेहद जरूरी कामों के लिए ही प्राथमिकता पर किया जाना चाहिए।
औद्योगिक बदलाव का सुझाव
IEA ने यह भी कहा कि उद्योग क्षेत्र में भी ऊर्जा खपत के तरीकों में बदलाव लाना अब समय की मांग है। जहां एलपीजी की भारी कमी है, वहां कंपनियां दूसरे ईंधन विकल्प जैसे नेफ्था का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भोजन पकाने जैसी प्राथमिक जरूरतों के लिए गैस की उपलब्धता बनी रहे।
सरकारों और नियमों की भूमिका
सरकारों को उदाहरण पेश करते हुए नियमों और योजनाओं के जरिए आम लोगों को ऊर्जा बचत के लिए जागरूक करना चाहिए। सहायता के मामले में IEA ने सलाह दी है कि सरकारों को केवल जरूरतमंद लोगों को ही वित्तीय सहायता देनी चाहिए। पूर्व के अनुभव बताते हैं कि सार्वभौमिक सब्सिडी के बजाय लक्षित सहायता योजनाएं आर्थिक रूप से ज्यादा प्रभावी होती हैं।
सप्लाई चेन पर बड़ा संकट
युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होने वाली वैश्विक तेल की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है जहां अब जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है। इस मार्ग से रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते थे जो अब बाधित हैं।
यह भी पढ़ें: इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 22.03 रुपये का बड़ा उछाल, ईरान-अमेरिका संघर्ष का दिखा असर
ऊर्जा बाजार पर प्रभाव
IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने स्पष्ट किया है कि यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। यदि युद्ध का जल्द समाधान नहीं हुआ तो ऊर्जा बाजार और आम आदमी की जेब पर इसका असर गंभीर होगा। रिपोर्ट बताती है कि सामूहिक प्रयासों से ही इस ऐतिहासिक सप्लाई संकट के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
