लोन वसूली के लिए ग्राहकों का शोषण नहीं कर सकते, वित्त मंत्री ने NBFC को हड़काया
Nirmala Sitharaman: निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्तीय समावेश के नाम पर वित्तीय शोषण नहीं किया जा सकता। लोन ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उसे लौटाने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए।
- Written By: मनोज आर्या
निर्मला सीतारमण, (केंद्रीय वित्त मंत्री )
NBFC Loan Rate: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों से ग्राहकों को लोन देने के लिए आक्रमक रूख नहीं अपनाने और ब्याज दर को उचित रखने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक शोषण नहीं करने की भी अपील की। फाइनेंस मिनिस्टर ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से भारतीय रिजर्व बैंक के लोन वसूली नियमों को सख्ती से पालन करने का भी आग्रह किया।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्तीय समावेश के नाम पर वित्तीय शोषण नहीं किया जा सकता। लोन ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उसे लौटाने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि कर्ज देने के लिए आक्रमक तरीके से मार्केटिंग नहीं किया जाना चाहिए यान उन्हें लोगों पर थोपा नहीं जाना चाहिए।
निष्पक्ष होनी चाहिए वसूली की प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने एनबीएफसी को चेतावनी देते हुए कहा कि वसूली की प्रक्रिया निष्पक्ष, सहानुभूतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए और इसे भारतीय रिजर्व बैंक के गाइडलाइनों के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से कहा कि लोन की वसूली आपके कामकाज का हिस्सा है, लेकिन संवेदनहीन होना आपके काम का हिस्सा नहीं है। वर्तमान समय में देश में कुल लगभग 9,000 एनबीएफसी हैं, जो ग्राहकों को जरूरत के हिसाब से वित्तीय सेवा दे रही हैं।
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रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान देने की जरूरत
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जैसे-जैसे एनबीएफसी परिपक्व होता है, रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही रिस्क उठाना सुनियोजित और आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए और संबंधित संस्था की जोखिम सहने की क्षमता से कभी अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैश और लोन रिस्क का सख्ती से मूल्यांकन और प्रबंधन किया जाना चाहिए। मजबूत आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था से परिसंपत्ति-देनदारी के बीच अंतर, वित्तपोषण स्त्रोतों की प्रकृति और अवधि की निगरानी सुनिश्चित होनी चाहिए।
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NBFC अब शैडो बैंक नहीं
केंद्रीय वित्त मंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान समय में कॉमर्शियल बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन की कुल मात्रा में उनकी हिस्सेदारी लगभग 24 फीसदी है और आगे इसे बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा की एनबीएफसी अब शैडो बैंक नहीं है। उनका मजबूत विनियमन और निगरानी वित्तीय प्रणाली और अर्थव्यवस्था में उनके महत्व का सबसे अच्छा प्रमाण है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभार ही सीतारमण ने कहा कि जैसे-जैसे देश आगे बढ़ेगा, भविष्य की लोन जरूरतों को पूरा करने में एनबीएफसी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
