लोन लेने वाले की मौत के बाद क्या परिवार को चुकाना होगा कर्ज? सच्चाई जान हैरान रह जाएंगे आप
Personal Loan: अगर पर्सनल लोन किसी व्यक्ति ने अपने नाम पर, बिना किसी को-बॉरोअर या गारंटर के लिया था, तो उसकी जिम्मेदारी उसी की होती है। ऐसे में उधार लेने वाले की मौत के बाद बैंक सीधे परिवार...
- Written By: मनोज आर्या
(कॉन्सेप्ट फोटो- AI)
Loan Recovery Rules: पर्सनल लोन लेते वक्त ज्यादातर लोग EMI, ब्याज और टेन्योर पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन एक जरूरी सवाल अक्सर नजरअंदाज हो जाता है कि अगर कर्ज लेने वाले की मौत हो जाए तो लोन का क्या होगा? क्या बैंक सीधे परिवार से पैसा वसूलेगा? क्या पत्नी, बच्चे या माता-पिता को अपनी जेब से EMI चुकानी पड़ेगी? कई लोगों को लगता है कि कर्ज भी इंसान के साथ खत्म हो जाता है, लेकिन हकीकत इससे अलग है।
दरअसल, लोन की जिम्मेदारी इस बात पर टिकी होती है कि लोन अकेले लिया गया था या जॉइंट, कोई गारंटर था या नहीं और इंश्योरेंस लिया गया था या नहीं। यही छोटे-छोटे फैक्टर तय करते हैं कि मुश्किल घड़ी में परिवार पर बोझ पड़ेगा या नहीं।
परिवार के सदस्यों से सीधे वसूली नहीं
अगर पर्सनल लोन किसी व्यक्ति ने अपने नाम पर, बिना किसी को-बॉरोअर या गारंटर के लिया था, तो उसकी जिम्मेदारी उसी की होती है। ऐसे में उधार लेने वाले की मौत के बाद बैंक सीधे परिवार के सदस्यों से वसूली नहीं कर सकता। हालांकि, बैंक मृतक की छोड़ी हुई संपत्ति जैसे बैंक बैलेंस, एफडी, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से बकाया रकम निकाल सकता है। मान लीजिए मृतक ने 10 लाख रुपये की संपत्ति छोड़ी है और 3 लाख रुपये का लोन बाकी है, तो पहले 3 लाख बैंक को मिलेंगे, बाकी 7 लाख वारिसों को मिलेंगे। अगर संपत्ति ही कम है, तो बैंक को बाकी रकम राइट-ऑफ करनी पड़ सकती है।
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को-बॉरोअर चुकाएगा पैसा
लेकिन अगर लोन जॉइंट लिया गया था यानी कोई को-बॉरोअर (अक्सर पति-पत्नी) है, तो एक के निधन के बाद दूसरा व्यक्ति पूरी EMI चुकाने के लिए जिम्मेदार होता है। यहां ‘जॉइंट लोन’ सिर्फ पात्रता बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी भी है।
गारंटर से वसूली कर सकता है बैंक
वहीं, अगर लोन में कोई गारंटर था, तो उधार लेने वाले की मौत और संपत्ति से पैसा न निकल पाने की स्थिति में बैंक गारंटर से वसूली कर सकता है। ऐसे में गारंटर की कमाई और संपत्ति पर भी असर पड़ सकता है।
लोन का इंश्योरेंस होने पर बीमा कंपनी चुकाएगी पैसा
कुछ मामलों में राहत तब मिलती है, जब लोन के साथ क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस लिया गया हो। इस बीमा के तहत उधार लेने वाले की मौत पर बीमा कंपनी बैंक को बाकी रकम चुका देती है। इसके लिए परिवार को डेथ सर्टिफिकेट और जरूरी दस्तावेज देकर क्लेम करना होता है।
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सबसे पहले बैंक को सूचना देना जरूरी
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उधार लेने वाले की मौत के बाद सबसे पहले बैंक को सूचना देना जरूरी है। बिना जानकारी के EMI भरते रहने के बजाय यह समझना चाहिए कि लोन किस तरह का था और कोई बीमा था या नहीं। सही प्लानिंग और साफ दस्तावेज परिवार को मुश्किल वक्त में बड़ी परेशानी से बचा सकते हैं।
