इंडियन इकोनॉमी (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : अकाउंटिंग और कंसल्टिंग कंपनी ईवाई ने बुधवार को भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में बड़ी बात की है। ईवाई ने कहा है कि यदि भारत को 6.5 से 7.0 प्रतिशत इकोनॉमिकल ग्रोथ रेट हासिल करने के लिए जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पादन में बदलाव के अनुपात में टैक्स रेवेन्यू में बढ़त यानी टैक्स में 1.2 से 1.5 उछाल की जरूरत है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार को रेवेन्यू कलेक्शन को मजबूत करने की जरूरत है, विशेष रूप से कर-से-जीडीपी अनुपात को वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में अनुमानित 12 प्रतिशत से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2030-31 तक 14 प्रतिशत करना होगा। ईवाई ने कहा कि भारत की फिस्कल स्ट्रैटेजी को जीडीपी में बदलाव के अनुपात में टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने, विवेकपूर्ण एक्सपेंस मेनजमेंट और सतत ग्रोथ सुनिश्चित करने के लिए निरंतर स्ट्रक्चरल रिफॉर्म पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 का बजट रणनीतिक रूप से विकास की अनिवार्यताओं के साथ फिस्कल मजबूती को बैलेंस करता है। श्रीवास्तव ने कहा है कि हालांकि, भारत को 6.5 से 7.0 प्रतिशत की मिडियम अवधि की ग्रोथ रेट हासिल करने और अपने विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए, यह सुनिश्चित करना होगा कि कर उछाल 1.2 से 1.5 के दायरे में बना रहे। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में तेजी लाने, सामाजिक क्षेत्र के खर्च को बढ़ाने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक राजकोषीय गुंजाइश बनाने में मदद मिलेगी।
ईवाई इंडिया इकनॉमी वॉच की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 3 साल में, ग्रोस टैक्स रेवेन्यू में उछाल धीरे-धीरे कम हुआ है। वित्त वर्ष 2023-24 में यह 1.4 से वित्त वर्ष 2024-25 के संशोधित अनुमान के अनुसार 1.15 पर आ गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इसके 1.07 रहने का अनुमान है।
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ईवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि टैक्स उछाल 1.2 से 1.5 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने से भारत सरकार को 6.5 से 7.0 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ रेट हासिल करने में मदद मिल सकती है। अगले वित्त वर्ष में देश का इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 6.3 से 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)