रुपये को मजबूत करने के लिए मास्टप्लान तैयार, इस बजट में हो सकता है बड़ा फैसला
प्रख्यात अर्थशास्त्री ने तर्क देते हुए कहा है कि हाई इंपोर्ट ड्यूटी से इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की डिमांड को कंट्रोल किया जा सकता है और रुपये के गिरते मूल्य को रोकने में मदद मिल सकती है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रुपया (सौ.सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के संसद में बजट पेश करने वाली है। इस बजट से पहले वित्त मंत्री का प्री बजट मीटिंग्स का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में ईवाई इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डी. के. श्रीवास्तव ने कहा है कि सरकार आने वाले बजट में रुपये की गिरावट को रोकने के लिए कई अहम कदम उठा सकती है। बताया जा रहा है कि इस बजट में रुपये की गिरावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार आयात पर बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी लगाने पर विचार कर रही है।
प्रख्यात अर्थशास्त्री ने तर्क देते हुए कहा है कि हाई इंपोर्ट ड्यूटी से इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की डिमांड को कंट्रोल किया जा सकता है और रुपये के गिरते मूल्य को रोकने में मदद मिल सकती है। रुपया 13 जनवरी को 86.70 प्रति डॉलर के ऑल टाइम लो लेवल पर पहुंच गया था।
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ इंटरव्यू में कहा है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में अचानक आयी गिरावट पॉलिसी मेकर्स के लिए एक चुनौती बनने जा रही है। राजकोषीय पक्ष पर बजट निर्माताओं के लिए और मौद्रिक पक्ष पर भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के लिए। उम्मीद की जा रही है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार होने जा रहा है और इसलिए बहुत सारे वित्तीय संसाधन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का रुख कर रहे हैं।
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इंपोर्ट ड्यूटी रेवेन्यू
श्रीवास्तव 15वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद के सदस्य भी हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ रुपया ही नहीं, बल्कि अन्य यूरोपीय मुद्राएं भी इसी तरह के दबाव का सामना कर रही हैं। श्रीवास्तव ने कहा है कि बजट में उनके पास विनिमय दरों की गति को प्रभावित करने के लिए कोई बहुत शक्तिशाली राजकोषीय साधन नहीं है, लेकिन वे शुल्क दरों की थोड़ी अधिक बारीकी से जांच कर सकते हैं और वे संभवतः भारतीय अर्थव्यवस्था को घरेलू उद्योग के लिए अधिक सुरक्षा की ओर ले जा सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप इंपोर्ट ड्यूटी रेवेन्यू भी बढ़ सकता है। इसके साथ ही, इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की डिमांड में कमी आ सकती है।
2 साल की सबसे बड़ी गिरावट
रुपये में 13 जनवरी को एक सत्र में करीब 2 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी और यह 66 पैसे के नुकसान के साथ 86.70 प्रति डॉलर के अपने ऑल टाइम लो लेवल पर बंद हुआ था। रुपये में इससे पहले 6 फरवरी 2023 को एक सत्र में 68 पैसे की गिरावट दर्ज की गई थी। रुपया 30 दिसंबर को 85.52 के स्तर पर बंद होने के बाद से पिछले 2 हफ्ते में 1 रुपये से ज्यादा बड़ी गिरावट देख चुका है। रुपया पहली बार 19 दिसंबर 2024 को 85 प्रति डॉलर के पार गया था।
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श्रीवास्तव ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अधिक सुरक्षा या समर्थन प्रदान करना नीतिगत मामला है। इंपोर्ट ड्यूटी में कुछ संशोधन हो सकते हैं। इस प्रकार, इंपोर्ट की डिमांड में कमी आ सकती है और घरेलू उत्पादन के जरिये इंपोर्ट के लिए कुछ प्रतिस्थापन हो सकता है। उन्होंने कहा कि डॉलर की डिमांड और एक्स्ट्रा इंपोर्ट ड्यूटी रेवेन्यू के संदर्भ में कुछ बचत हो सकती है। साथ ही इन सभी उपायों से शुल्क वृद्धि और युक्तिकरण की दिशा में कुछ प्रगति हो सकती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
