चीन के हाथ लग सकती है आपकी पर्सनल डिटेल, DeepSeek के इस्तेमाल से हो जाइएं सावधान
डीपसीक के एफएक्यू पेज पर दी जाने वाली जानकारी के अनुसार, ये आपके आईपी एड्रेस, पेमेंट डिटेल, डिवाइस आईडी, कुकीज और एआई चैटबॉट पर हुई बातों पर भी पैनी नजर रखता है।
- Written By: अपूर्वा नायक
डीपसीक, फोटो - सोशल मीडिया
नई दिल्ली : चीन ने हाल ही में अपने एआई मॉडल डीपसीक को लॉन्च करके धमाका कर दिया है। ऐप स्टोर पर ओपनएआई के चैटजीपीटी को सीधी टक्कर देते हुए ऐप डाउनलोड के मामले में ये टॉप पोजिशन पर पहुंच गया है। इस एआई मॉडल की सबसे खास बात ये है कि ये सभी के लिए फ्री है। सारी खूबियां मौजूद होने के बाद भी अगर डीपीसीक की प्राइवेसी पॉलिसी पर नजर डालें, तो इससे ये पता चलता है कि इस एआई टेक्नोलॉजी का रजिस्टर्ड ऑफिस चीन में मौजूद है।
क्या आप जानते हैं कि डीपसीक अपने यूजर्स की प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी जैसे कि नाम, फोन नंबर, पासवर्ड और डेट ऑफ बर्थ को कहां स्टोर करता है? डीपसीक के एफएक्यू पेज पर दी जाने वाली जानकारी के अनुसार, ये आपके आईपी एड्रेस, पेमेंट डिटेल, डिवाइस आईडी, कुकीज और एआई चैटबॉट पर हुई बातों पर भी पैनी नजर रखता है। साथ ही ऑनलाइन आपकी एक्टिविटीज पर नजर रखने के लिए डीपसीक कुकीज और वेब बीकन का भी उपयोग करता है।
डीपसीक के माध्यम से आपके डिवाइस मॉडल, ऑपरेटिंग सिस्टम तक की जानकारी चीन के पास पहुंच रही है। ऐप पर यूजर्स की डेटा को चीनी सर्वर पर स्टोर भी किया जा रहा है। डीपसीक की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, आपसे जुटाए गई पर्सनल जानकारी को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना में मौजूद सुरक्षित सर्वर में स्टोर किया जा सकता है।
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यूजर्स के बीच बढ़ा डीपसीक का क्रेज
भारत में इस समय डीपसीक की लोकप्रियता को लेकर कोई भी साफ जानकारी नहीं है, लेकिन बताया जा रहा है कि अमेरिका में इसको लेकर जबरदस्त क्रेज देखा जा सकता है। जिसका मतलब है कि अमेरिका अपनी जानकारी चीनी सर्वरों के हाथों में सौंप रहा है। आपको जानकारी दें कि भारत में साल 2020 में चीनी ऐप टिकटॉक को बैन कर दिया गया था। उस समय भी सुरक्षा और प्राइवेसी के प्रति खतरे को देखते हुए ये कारवाई की गई थी।
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डीपसीक क्या हैं?
हांग्जो बेस्ड डीपसीक 2023 से एक एआई मॉडल पर काम कर रहा है। इस कंपनी की नींव लियान वेनफेंग ने रखी थी। ऐसा माना जाता है कि इसे एआई चैटबॉट चैटजीपीटी को टक्कर देने के लिए लॉन्च किया गया है। बाकी अमेरिकी कंपनियों के मुकाबले ये सस्ता है और इसमें डेटा भी कम ही खर्च होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस एआई मॉडल को डेवलप करने में सिर्फ 6 मिलियन डॉलर ही लगे थे, जबकि एआई के लिए अमेरिकी टेक कंपनियों ने खूप पैसे बहाए।
