Real Estate: क्रेडाई की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, देश के टॉप 6 शहरों में बढ़ी ग्रीन ऑफिस स्पेस की डिमांड
रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले एक दशक में कई अहम बदलाव हुए हैं और आने वाले समय में ये कई प्रकार से बदल सकता है। इसी सिलसिले में रियल एस्टेट सेक्टर के टॉप इंस्टीट्यूट्स क्रेडाई ने एक रिपोर्ट जारी की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रियल एस्टेट सेक्टर (सौ. सोशल मीडिया )
अहमदाबाद : रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिसमें बताया जा रहा है कि देश के 6 टॉप शहरों में ग्रीन सर्टिफाइड बिल्डिंग में ऑफिस स्पेस की लीस डिमांड साल 2024 में 20 प्रतिशत तक बढ़कर 4.92 करोड़ स्कवेयर फुट हो गई है। एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
रियल एस्टेट सेक्टर के टॉप इंस्टीट्यूट्स क्रेडाई और रियल एस्टेट सलाहकार कोलियर्स इंडिया की शुक्रवार को यहां ‘रियल एस्टेट में पर्यावरण अनुकूल उपाय: हरित क्षितिज की ओर’ टाइटल से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीन सर्टिफाइड बिल्डिंग में ऑफिस स्पेस की लीस डिमांड साल 2024 में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 4.92 करोड़ वर्ग फुट हो गई, जो पिछले साल यानी 2023 में 4.1 करोड़ वर्ग फुट थी। ग्रीन बिल्डिंग्स का किराया ज्यादा होता है।
क्रेडाई के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर जी. पटेल ने रिपोर्ट में कहा है कि भारत ने महत्वाकांक्षी जलवायु टारगेट सेट किए हैं, जिनमें साल 2070 तक शुद्ध रूप से 0 कार्बन उत्सर्जन हासिल करना और साल 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तेजी को 45 प्रतिशत से कम करना शामिल है। रियल एस्टेट कार्बन उत्सर्जन के लिए काफी हद तक जिम्मेदार रहता है। ऐसे में ग्रीन बिल्डिंग एक्टिविटीज, एनर्जी एफिशिएंट टेक्नोलॉजी के उपयोग और रिन्यूऐबल एनर्जी एकीकरण में इन टारगेट्स को आगे बढ़ाने की क्षमता है।
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पटेल ने 2025 से 2027 अवधि के लिए शुक्रवार को अध्यक्ष का पदभार संभाला। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में यह बदलाव पहले ही रफ्तार पकड़ चुका है और रेसिडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल स्पेस में ग्रीन बिल्डिंग अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी सीईओ बादल याग्निक ने कहा है कि कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री ग्लोबल कार्बन उत्सर्जन के काफी जिम्मेदार रहता है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का करीब 40 प्रतिशत है। रियल एस्टेट सेक्टर ट्रांसफॉर्मेशन के चौराहे पर खड़ा है, जहां एंवारंमेंटल फ्रेंडली उपाय अब एक ऑप्शन नहीं बल्कि एक जरूरत है।
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भारत में साल 2024 तक ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस करीब 50.3 करोड़ वर्ग फुट था। ग्रीन सर्टिफाइड बिल्डिंग को पर्यावरण अनुकूल इमारतें भी कहा जाता है। ये ऐसे भवन होते हैं जो एनर्जी, पानी और अन्य संसाधनों का कुशल उपयोग करते हैं। साथ ही प्रदूषण तथा वेस्ट में इनका योगदान कम रहता है और पर्यावरण पर कम प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
