क्या ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से 8 से10 प्रतिशत टूट सकता है रुपया? SBI के रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
SBI की रिपोर्ट में यह संकेत भी दिया गया है कि ट्रंप की वापसी के साथ, शुल्कों में वृद्धि, एच-1बी वीजा पर प्रतिबंध और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों से अल्पावधि में अस्थिरता बढ़ सकती है।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
कॉन्सेप्ट फोटो
नई दिल्ली : भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अगले कुछ महीनों में 8-10 प्रतिशत तक कमजोर हो सकता है, यह अनुमान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट में लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी भारतीय मुद्रा पर दबाव बना सकती है, जिसके कारण रुपये में गिरावट देखने को मिल सकती है। सोमवार 11 नवंबर को रुपये ने डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक निचले स्तर को छुआ, जो इस अनुमान को और मजबूत करता है।
बता दें, रिपोर्ट का टाइटल है, “अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024: ट्रंप 2.0 भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगा”। इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है, लेकिन बाद में भारतीय मुद्रा की स्थिति मजबूत हो सकती है। यह अस्थिरता अल्पावधि में देखने को मिल सकती है, जब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत होगी। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत के पास इस दौरान चुनौतियों के साथ-साथ कई अवसर भी होंगे।
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SBI की रिपोर्ट में यह संकेत भी दिया गया है कि ट्रंप की वापसी के साथ, शुल्कों में वृद्धि, एच-1बी वीजा पर प्रतिबंध और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों से अल्पावधि में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि, इससे भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार करने, निर्यात बाजारों में विविधता लाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा। रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
भारत के लिए, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से जुड़ी अनिश्चितता को देखते हुए, निर्यात क्षेत्र में विविधता लाना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, भारतीय कंपनियों को विदेशी मुद्रा दरों की अस्थिरता से बचने के लिए अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता हो सकती है।
SBI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के शासनकाल में वैश्विक अर्थव्यवस्था में कई बदलाव हो सकते हैं, जिनका प्रभाव भारत पर भी पड़ेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था को ऐसे बदलावों के साथ तालमेल बैठाने की चुनौती होगी, लेकिन सही रणनीतियों के साथ भारत इसे अवसरों में बदल सकता है।
एजेंसी इनपुट के साथ।
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