बजट 2024 से पहले दूरसंचार उद्योग जगत की बड़ी मांग, डिजिटल इन्फ्रा पर फोकस बढ़ाए सरकार
21 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। 22 को संसद का बजट सत्र शुरू होगा। जिसमें 23 जुलाई को केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2024-25 के लिए बजट पेश करेंगी। अब बजट की बेला है तो हर सेक्टर की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। कुछ उम्मीदों के सहारे बैठे हुए हैं तो कुछ ने साफ तौर पर अपनी मांग रख दी है।
- Written By: अभिषेक सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : 21 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। 22 को संसद का बजट सत्र शुरू होगा। जिसमें 23 जुलाई को केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2024-25 के लिए बजट पेश करेंगी। अब बजट की बेला है तो हर सेक्टर की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। कुछ उम्मीदों के सहारे बैठे हुए हैं तो कुछ ने साफ तौर पर अपनी मांग रख दी है। इसमें उद्योग जगत भी शामिल है।
डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडिंग अथॉरिटी (डीआईपीए) ने सोमवार को सरकार से फाइनेंशियल इयर 2024-25 के बजट में जीएसटी के आधार पर टेलिकॉम टावर्स के लिए भी इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रावधान करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि केन्द्र सरकार अगर उनकी मांग पर विचार करती है और पूरी करती है तो इससे बुनियादी ढांचा प्रदाताओं की लागत में बड़ी कमी आएगी।
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संघ की तरफ से बताया गया कि बुनियादी ढांचा प्रदाताओं की लागत में कमी आने से उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा। क्योंकि किसी उद्योग को वस्तु या सेवाओं की खरीद पर जो जीएसटी देना पड़ता है, कुछ माल और सेवाओं के मामले में वह रिटर्न हो जाता है। यही इनपुट टैक्स क्रेडिट है। इसीलिए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडिंग अथॉरिटी ने संबंधित बुनियादी ढांचों और एसेसरीज पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के से जुड़े स्पष्टीकरण की भी मांग की है।
अस्पष्टता से बढ़ी लागत
डीआईपीए के महानिदेशक तिलक राज दुआ ने कहा कि मौजूदा अस्पष्टता के कारण इस उद्योग की लागत काफी बढ़ गई है। इसलिए डीपीआईए की अपील है कि अगले बजट से पहले सरकार से ऐसी नीतियों को प्राथमिकता दे जिससे देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ज्यादा मजबूत हो। उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल भविष्य दूरसंचार नेटवर्क, स्पेशली 5जी के तेज विस्तार और कनेक्टिविटी में होने वाले सुधारों पर डिपेंड करता है।
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राज दुआ आगे बताया कि दूरसंचार ढांचे के लिए उचित दर पर बिजली की उपलब्धता भी इंपॉर्टेंट है। इससे परिचालन लागत में कमी आएगी और जिससे बचे धन का उपयोग नेटवर्क विस्तार में किया जाएगा। इसके साथ ही डीपीआईए ने सभी राज्यों में संशोधित राइट ऑफ वे नियमों को लागू करने की भी मांग की है।
