Budget 2026: तमिलनाडु के लिए बड़ी सौगात, हाई-स्पीड रेल और दुर्लभ खनिज गलियारा मंजूर

Tamil Nadu Rare Mineral Corridor: बजट 2026 में तमिलनाडु के लिए दुर्लभ खनिज गलियारे, चेन्नई हाई-स्पीड रेल और पश्चिमी घाट में ईको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स का ऐलान। जानिए कैसे बदलेगा राज्य का बुनियादी ढांचा।
Tamil Nadu Rare Mineral Corridor
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Chennai Hyderabad High Speed Rail: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में तमिलनाडु के विकास को नई गति देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। इस बजट में बुनियादी ढांचे (Infrastructure), तकनीक और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। सरकार का मुख्य फोकस राज्य की खनिज संपदा का सही उपयोग करने और कनेक्टिविटी को वैश्विक स्तर पर ले जाने पर है।

दुर्लभ खनिज गलियारा: औद्योगिक क्रांति की ओर कदम

बजट के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक 'दुर्लभ खनिज गलियारे' (Rare Mineral Corridor) की स्थापना है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि नवंबर 2025 में शुरू की गई 'रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट' योजना को विस्तार दिया जाएगा। तमिलनाडु को ओडिशा, केरल और आंध्र प्रदेश के साथ इस विशेष गलियारे में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य में दुर्लभ खनिजों के खनन, प्रसंस्करण (Processing), अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देना है। यह कदम न केवल भारत की आयात निर्भरता कम करेगा, बल्कि उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए कच्चा माल भी उपलब्ध कराएगा।

कनेक्टिविटी में सुधार: हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

चेन्नई की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री ने सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें हैदराबाद-चेन्नई और चेन्नई-बेंगलुरु रूट शामिल होंगे। ये कॉरिडोर शहरों के बीच 'कनेक्टर' के रूप में कार्य करेंगे, जिससे यात्रा का समय कम होगा और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। यह परियोजना पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ यात्री प्रणालियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा निवेश है।

ईको-टूरिज्म और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

तमिलनाडु की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। पश्चिमी घाट के पोधिगई मलाई में पर्यावरण के अनुकूल पर्वतीय मार्ग (Sustainable Mountain Routes) विकसित किए जाएंगे, जिससे भारत में विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग का अनुभव मिल सकेगा। इसके अलावा, पुलिकट झील के किनारे पक्षी अवलोकन पथों (Bird Observation Paths) का निर्माण किया जाएगा।

वहीं, सांस्कृतिक मोर्चे पर आदिचनल्लूर के पुरातात्विक स्थल को एक 'जीवंत अनुभव जन्य सांस्कृतिक गंतव्य' के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय इतिहास और संस्कृति को नई पहचान भी मिलेगी। सरकार के ये कदम राज्य के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करने की एक ठोस कोशिश हैं।

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