मिडिल क्लास को 'ठेंगा' दिखा गई सरकार?...निवेशकों को हलाल कर गया बाजार, बजट से चकनाचूर हुईं ये 5 बड़ी उम्मीदें

Five Disappointing Point of Budget 2026: केंद्र की मोदी सरकार के बजट 2026 से देश की आम जनता को बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन पेश हुए ऐलानों ने इन उम्मीदों पर जैसे ठंडा पानी डाल दिया।
Five Disappointing Point of Budget 2026
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Five Disappointing Point of Budget 2026: बजट 2026 से देश की आम जनता को बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन पेश हुए ऐलानों ने इन उम्मीदों पर जैसे ठंडा पानी डाल दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भले ही इसे आम आदमी, महिलाओं, किसानों और युवाओं पर केंद्रित बताया हो मगर मिडिल क्लास को इस बजट में कोई ठोस राहत नजर नहीं आई। इतना ही नहीं, बाजार की उम्मीदों के उलट फैसलों ने शेयर निवेशकों को भी जोरदार झटका दे दिया, जिससे निराशा का माहौल साफ दिखाई दे रहा है।

इस बजट में कई ऐसी बड़ी घोषणाएं गायब रहीं, जिनसे आम आदमी को सीधी राहत मिलने की उम्मीद थी। सरकार ने नई योजनाओं और प्राथमिकताओं की बात तो की, लेकिन जेब पर बोझ कम करने वाले ठोस फैसले नजर नहीं आए। आइए नजर डालते हैं उन अहम घोषणाओं पर, जिनके न होने से आम नागरिकों में निराशा साफ दिखी...

इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं

सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स को लेकर थी। पिछले बजट में नए टैक्स सिस्टम के तहत 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर प्रभावी रूप से “जीरो” टैक्स का ऐलान किया गया था। इस बार कयास लगाए जा रहे थे कि यह सीमा बढ़ाकर 14 लाख रुपये कर दी जाएगी, लेकिन सरकार ने टैक्स स्लैब में किसी तरह का बदलाव नहीं किया, जिससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को मायूसी हाथ लगी।

नई टैक्स व्यवस्था में कोई छूट नहीं

नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाने की उम्मीद थी, लेकिन निवेशकों और सैलरीड क्लास को बड़ा झटका लगा। कयास थे कि PPF, NPS और ELSS जैसी बचत योजनाओं में निवेश को नई टैक्स प्रणाली के तहत भी टैक्स छूट का फायदा मिलेगा, मगर ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया। ये लाभ अब भी सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही सीमित हैं, जहां धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की कटौती मिलती है। नई व्यवस्था चुनने वालों के लिए बचत पर टैक्स राहत का रास्ता बंद ही रहा।

किसानों के लिए बड़ी घोषणा गायब

किसानों को उम्मीद थी कि पीएम किसान सम्मान निधि की राशि 6,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये सालाना की जाएगी, लेकिन बजट में इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसके अलावा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर भी कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधी राहत मिलने की उम्मीद अधूरी रह गई।

वरिष्ठ नागरिकों को भी निराशा

सीनियर सिटीज़न्स को बीमा योजनाओं में अतिरिक्त सहायता और रेलवे टिकटों पर रियायत की आस थी। मगर बजट में केवल रेलवे कॉरिडोर जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर घोषणाएं दिखीं, सीधे राहत वाले फैसले नहीं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए TDS कटौती की सीमा में भी कोई बदलाव नहीं किया गया।

शेयर बाजार निवेशकों को झटका

बाजार से जुड़े निवेशकों के लिए भी बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। F&O ट्रेडर्स के ट्रांजैक्शन चार्ज घटने की उम्मीद थी, लेकिन उल्टा इन्हें बढ़ा दिया गया। साथ ही लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स में भी कोई राहत नहीं दी गई। नतीजतन बाजार क्रैश हो गया और निवेशकों को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ा।

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