पेट्रोल और डीजल पर GST लगाने को लेकर फैसला (सोर्स-सोशल मीडिया)
Petrol Diesel GST Budget 2026: भारत के आगामी बजट 2026 को लेकर आम जनता के बीच काफी उत्साह और बड़ी उम्मीदें बनी हुई हैं। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच यह सवाल हर जगह उठ रहा है कि क्या इन्हें GST के दायरे में लाया जाएगा। पेट्रोल डीजल GST बजट 2026 के इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार की ओर से मिलने वाले संकेतों का इंतजार सभी को काफी बेसब्री से है। तेल की कीमतों में बड़ी कमी की संभावनाओं को लेकर अब आर्थिक विशेषज्ञों के बीच भी गहन चर्चा शुरू हो गई है।
पेट्रोल और डीजल को GST के अंतर्गत शामिल करने का अंतिम फैसला पूरी तरह से GST परिषद की सिफारिशों पर ही निर्भर करता है। इस परिषद में केंद्र सरकार और सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं जो राजस्व के संभावित नुकसान पर विस्तार से चर्चा करते हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्यों की सहमति सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे उनकी कर से होने वाली कमाई सीधे जुड़ी है।
अगर भविष्य में ईंधन को GST के दायरे में लाया जाता है, तो इसकी मौजूदा कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। वर्तमान समय में पेट्रोल पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें दोनों ही अपनी-अपनी ओर से अलग-अलग प्रकार के कर वसूलती हैं। GST व्यवस्था लागू होने से कर की दरें देशभर में एक समान और अधिक तर्कसंगत हो सकती हैं जिससे आम आदमी को राहत मिलेगी।
सरकार के सामने इस समय सबसे मुख्य चुनौती उस राजस्व घाटे को संतुलित करने की है जो ईंधन पर लगने वाले कर से प्राप्त होता है। कई राज्यों को यह डर सता रहा है कि GST लागू होने के बाद उनके वित्तीय संसाधनों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए बजट 2026 में इस विषय पर कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले एक बहुत ही गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का यह मानना है कि पेट्रोल और डीजल को GST में शामिल करना लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। इससे पूरे देश में परिवहन लागत कम होगी और बाजार में बढ़ती महंगाई पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाने में काफी मदद मिल सकती है। सरकार संभवतः इस नई दिशा में धीरे-धीरे कदम बढ़ाने का कोई संकेत अपने बजट 2026 के भाषण में दे सकती है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस बात की कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि बजट 2026 में यह ऐतिहासिक बदलाव अनिवार्य रूप से होगा। हालांकि, देश के विभिन्न उद्योग जगत और आम नागरिक इस बड़े कर सुधार की मांग पिछले काफी लंबे समय से निरंतर कर रहे हैं। आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का भविष्य मुख्य रूप से GST परिषद की अगली महत्वपूर्ण बैठकों के नतीजों पर टिका है।
वर्तमान में पेट्रोल पर वैट और एक्साइज ड्यूटी के ऊंचे बोझ के कारण तेल की कीमतें आम जनता के लिए काफी अधिक बनी रहती हैं। अगर GST लागू होता है तो इस पर अधिकतम 28 प्रतिशत कर लगने की संभावना जताई जा रही है जिससे कीमतों में सुधार होगा। बजट 2026 इस दिशा में राज्यों के साथ एक नया संवाद स्थापित करने का एक बहुत ही अच्छा अवसर साबित हो सकता है।
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ईंधन की कीमतें सीधे तौर पर देश में माल की ढुलाई और रसद की लागत को प्रभावित करती हैं जिससे बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं। GST के आने से रसद क्षेत्र की लागत काफी सस्ती होगी और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम काफी कम हो सकते हैं। यह कदम आम आदमी की मासिक बचत को बढ़ाने और उसकी जेब पर बोझ कम करने में वास्तव में क्रांतिकारी साबित हो सकता है।
बजट 2026 की तैयारी के बीच ईंधन की कीमतों के प्रबंधन को लेकर सरकार पर जनता और विपक्ष का काफी दबाव देखा जा रहा है। सरकार इस बार के बजट में ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए कुछ बहुत ही बड़े और साहसी सुधारों की घोषणा कर सकती है। पेट्रोल और डीजल को GST के अंतर्गत लाना इन प्रस्तावित सुधारों का एक सबसे अहम और प्रतीक्षित हिस्सा माना जा रहा है।
Ans: बजट 2026 में सरकार पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने के संबंध में कुछ शुरुआती संकेत या रूपरेखा पेश कर सकती है।
Ans: विशेषज्ञों के अनुसार GST के तहत अधिकतम कर की दर 28% होने की संभावना है जिससे तेल की कीमतें मौजूदा दरों से काफी कम हो सकती हैं।
Ans: अधिकांश राज्यों को यह डर है कि GST लागू होने से पेट्रोल और डीजल से प्राप्त होने वाले उनके वर्तमान राजस्व में भारी कमी आ सकती है।
Ans: GST परिषद की बैठकों में समय-समय पर इस मुद्दे पर चर्चा होती रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम सर्वसम्मति नहीं बन पाई है।
Ans: यह एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है और सभी राज्यों की पूर्ण सहमति मिलने के बाद ही इसे चरणबद्ध तरीके से देश भर में लागू किया जा सकेगा।