Budget 2026: निवेशकों के लिए ‘निर्मम’ निर्मला, मंदी की मार झेल रहे करोड़ों निवेशकों पर डबल मार
Budget For Investor: बजट से हर निवेशक और कारोबारी यह उम्मीद कर रहे थे कि इस बार शेयर बाजार को मंदी से उबारने के लिए वित्त मंत्री कुछ टैक्स रियायतों की घोषणा करेंगी, लेकिन उल्टे दोहरी मार पड़ी है।
- Written By: मनोज आर्या
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Union Budget 2026: भारतीय शेयर बाजार में मंदी और घाटे की मार झेल रहे करोड़ों आम निवेशकों को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डबल झटका दिया है। वर्ष 2026-27 के बजट से हर निवेशक और कारोबारी यह उम्मीद कर रहे थे कि इस बार शेयर बाजार को मंदी से उबारने के लिए वित्त मंत्री कुछ टैक्स रियायतों की घोषणा करेंगी, लेकिन उल्टे एसटीटी के रूप में टैक्स बोझ बढ़ाकर उन पर दोहरी मार की है, तभी बीएसई सेंसेक्स 1547 अंकों की भारी गिरावट के साथ रविवार को भी मंदी के गर्त में धंस गया।
एक निवेशक रमेश गौड़ का कहना है कि वित्त मंत्री निवेशकों पर लगातार टैक्स बोझ बढ़ा रही है। पहले 10% का भारी लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन (एलटीसीजी) टैक्स थोपा, फिर उसे बढ़ाकर 12.5% कर दिया। उसके साथ शॉर्ट टर्म कैपिटल गैन (एसटीसीजी) टैक्स भी दोगुना कर 20% कर दिया।
निवेशकों के उम्मीदों पर फिरा पानी
निवेशकों का कहना है कि इतने भारी टैक्स बोझ से मन नहीं भरा तो सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) टैक्स भी बढ़ा दिया। इस बार बड़ी उम्मीद थी कि कम से कम एसटीटी में कटौती या उसे खत्म कर दिया जाएगा, क्योंकि यह डबल टैक्सेशन है। लेकिन यहां भी वित्त मंत्री ने उल्टे एसटीटी में 150% की भारी वृद्धि कर डाली।
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केवल भारत में डबल टैक्सेशन
दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने कहा कि पहले भारत में एलटीसीजी टैक्स नहीं था और पिछली सरकार ने जब एसटीटी लगाया तो यह तर्क दिया था कि यहां एलटीसीजी नहीं है। इसलिए एसटीटी लगाया जा रहा है और फिर इस सरकार ने 10% एलटीसीजी टैक्स भी लगा दिया, लेकिन एसटीटी नहीं हटाया, उल्टे उसमें और बढ़ोतरी की जा रही है। ऐसा डबल टैक्स दुनिया के किसी बाजार में नहीं है। यहां सरकार किस दिशा में बाजार को ले जाना चाहती है, यह बड़ा सवाल है।
अधिकांश निवेशक घाटे में, फिर भी टैक्स
रिटेल निवेशक सुरेश राठौड़ का कहना है कि वित्त मंत्री टैक्स बोझ बढ़ाने के पहले यह नहीं देख रही कि इस फाइनेंशियल ईयर में देश में निवेशकों को फायदा भी हुआ है या नहीं? इस साल बाजार में अधिकांश निवेशक घाटे में हैं। पिछले बजट में कैपिटल गैन टैक्स बढ़ाया तो बाजार में मंदी आ गयी। जिसके कारण निवेशक भारी घाटे में आ गए हैं। इसके अलावा सरकार ने पूंजीपतियों को मनमानी कीमतों पर महंगे आईपीओ लाकर देश के निवेशकों को लूटने की छूट दे रखी है। जिस पर वित्तमंत्री ने बजट में एक शब्द नहीं कहा।
अब बजट में टैक्स बोझ और बढ़ाने से मंदी का खतरा बढ़ गया है। जिससे देश भर के करोड़ों निवेशकों का नुकसान और बढ़ेगा। ऐसे में किसी को कैपिटल गैन नहीं है, सभी को कैपिटल लॉस ही है। इसकी वित्तमंत्री को कोई चिंता नहीं है।
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इस टैक्स पर ध्यान देंगे प्रधानमंत्री?
एक अन्य निवेशक श्याम किशोर का कहना है कि यदि एक्सचेंजों ने हमेशा की तरह रविवार को बजट 2026 बाजार बंद रखा होता तो कम से कम आज छुट्टी के दिन तो हमारा नुकसान नहीं होता और हम संडे को तो चिंतामुक्त रहते। वित्त मंत्री ने एसटीटी बढ़ाकर हमारा घाटा और बढ़ा दिया है। हम फायदे में शेयर बेचे या घाटे में, सरकार को टैक्स (एसटीटी) तो देना ही पड़ता है। क्या प्रधानमंत्री इस अनुचित टैक्स पर ध्यान देंगे?
नवभारत के लिए विष्णु भारद्वाज की रिपोर्ट-
