Budget 2026: टैक्स स्लैब में बदलाव, क्या ₹24 लाख से ऊपर की कमाई पर 30% टैक्स की सीमा बढ़ेगी?
Budget 2026 Update: बजट 2026 में 30% टैक्स स्लैब की सीमा ₹24 लाख से बढ़कर ₹50 लाख हो सकती है। न्यू टैक्स रिजीम में बदलाव से मिडिल क्लास की बचत बढ़ने और टैक्स बोझ कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
- Written By: प्रिया सिंह
बजट 2026 (सोर्स-सोशल मीडिया)
New Income Tax Slab 2026: भारत में बजट 2026 को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और हर बार की तरह मध्यम वर्ग की निगाहें इनकम टैक्स स्लैब में होने वाले बदलावों पर टिकी हैं। पिछले बजटों में सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को बढ़ावा देते हुए करदाताओं को बड़ी राहत दी थी, जिसमें 30% के उच्चतम टैक्स ब्रैकेट की सीमा को ₹15 लाख से बढ़ाकर ₹24 लाख कर दिया गया था। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह उम्मीद की जा रही है कि क्या सरकार इस सीमा को और ऊपर ले जाकर ₹40 से ₹50 लाख तक करेगी। आइये जानते हैं मौजूदा टैक्स ढांचा क्या है और आगामी बजट से आम आदमी और ऊंचे वेतनभोगियों को क्या उम्मीदें हैं।
मौजूदा टैक्स स्लैब और 30% की सीमा
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई टैक्स व्यवस्था के तहत सरकार ने ₹24 लाख से अधिक की आय पर 30% टैक्स दर निर्धारित की है। इससे पहले यह सीमा मात्र ₹15 लाख थी, जिसे बढ़ाकर मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग के लिए टैक्स का बोझ काफी कम किया गया। वर्तमान स्लैब के अनुसार, ₹4 लाख तक की आय पूरी तरह टैक्स फ्री है, जबकि ₹12.75 लाख तक की आय पर स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट के कारण प्रभावी टैक्स शून्य हो जाता है।
बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें?
आगामी बजट 2026 से टैक्सपेयर्स की सबसे बड़ी मांग यह है कि 30% वाले उच्चतम स्लैब की शुरुआती सीमा को ₹24 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो ₹24 लाख से ₹50 लाख के बीच कमाने वाले लाखों वेतनभोगी कर्मचारियों की बड़ी बचत होगी। इसके अलावा, स्टैंडर्ड डिडक्शन की ₹75,000 की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर ₹1 लाख करने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है।
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न्यू टैक्स रिजीम बनाम पुरानी व्यवस्था
सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था को डिफॉल्ट विकल्प बना दिया है, जिसमें छूट और कटौतियों के बिना कम टैक्स रेट का लाभ मिलता है। हालांकि, पुरानी व्यवस्था अभी भी उन लोगों के लिए प्रासंगिक है जिनके पास होम लोन या बीमा जैसे बड़े निवेश हैं। लेकिन सरकार का स्पष्ट झुकाव न्यू रिजीम को सरल बनाने की ओर है, ताकि करदाता को जटिल कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिले।
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बढ़ती महंगाई और टैक्स में राहत
महंगाई के दौर में लोगों के पास बचत के लिए बहुत कम पैसा बच रहा है, यही कारण है कि स्लैब विस्तार की मांग जोर पकड़ रही है। अगर सरकार ₹15-20 लाख के बीच के स्लैब में भी टैक्स की दरों को थोड़ा कम करती है, तो इससे घरेलू खपत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल सभी की निगाहें वित्त मंत्री के भाषण पर हैं कि क्या वे मध्यम वर्ग को एक बार फिर बड़ी खुशखबरी देंगी।
