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Budget 2026: कहीं खुशी, कहीं गम! बजट के पिटारे से किसके हिस्से आई चांदी और किसका हुआ दिवाला? देखें पूरी लिस्ट

Budget Analysis: सरकार ने टैक्सपेयर्स को सीधे टैक्स स्लैब में छूट देने के बजाय आयकर नियमों को सरल बनाकर उन्हें राहत देने की कोशिश की है। इसमें इनकम टैक्स रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के नियम बदले है।

  • Written By: मनोज आर्या
Updated On: Feb 02, 2026 | 04:51 PM

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, (कॉन्सेप्ट फोटो)

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Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। हर बार की तरह इस बार भी यह बजट अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए कहीं राहत तो कहीं दबाव लेकर आया। रविवार को पेश किए गए इस बजट का मूल उद्देश्य देश के विकास, सुधार और आर्थिक स्थायित्व को बनाए रखना रहा।

एक ओर जहां विकास को प्राथमिकता देते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने अपनी राजस्व स्थिति मजबूत करने के लिए कुछ क्षेत्रों में सख्ती भी दिखाई है।

टैक्सपेयर्स को क्या राहत?

राहत भरे कदमों की बात करें तो सरकार ने टैक्सपेयर्स को सीधे टैक्स स्लैब में छूट देने के बजाय आयकर नियमों को सरल बनाकर उन्हें राहत देने की कोशिश की है। इसमें इनकम टैक्स रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देना, कर दंड को कम करना और कुछ तकनीकी या अनजाने में हुई गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना शामिल है। इन उपायों से करदाताओं पर मानसिक दबाव कम होने के साथ-साथ टैक्स सिस्टम में भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

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विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने नियमों में ढील दी है। निवेश की सीमाओं को बढ़ाने और टैक्स से जुड़े कुछ प्रावधानों को सरल बनाने से भारत को निवेश के लिहाज से ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य लंबी अवधि में पूंजी प्रवाह बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।

उपभोक्ताओं को क्या मिला?

उपभोक्ताओं के नजरिये से देखें तो बजट में कई जीवन रक्षक दवाओं और जरूरी मेडिकल सामग्री पर सीमा शुल्क में कटौती की गई है, जिससे इलाज की लागत कम होने की संभावना है। हालांकि, कुछ डिजिटल उत्पादों और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर कोई खास राहत न मिलने से उपभोक्ताओं के एक वर्ग को निराशा भी हाथ लगी है। कुल मिलाकर बजट विकास और राजस्व संतुलन के बीच संतुलन साधने की कोशिश करता दिखता है, लेकिन आम आदमी को मिली राहत सीमित ही नजर आती है।

बजट 2026 से क्या फायदा?

इस बजट में कई ऐसे कदम उठाए गए हैं जो आम उपभोक्ताओं, उद्योग और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों के लिए फायदेमंद माने जा रहे हैं। सरकार ने 17 तरह की जीवनरक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया है। इनमें कैंसर की दवाएं, जरूरी मेडिकल मेडिसीन्स और सात तरह की दुर्लभ बीमारियों के लिए विशेष भोजन शामिल हैं। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज की लागत कम होने की उम्मीद है और मरीजों को सीधी राहत मिलेगी।

पहले के मुकाबले सस्ते होंगे ये उत्पाद

इसके अलावा माइक्रोवेव ओवन पर सीमा शुल्क में कटौती की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को इसकी कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। उद्योग जगत को ध्यान में रखते हुए कई तरह के कैपिटल गुड्स पर भी सीमा शुल्क में कटौती बढ़ाई गई है, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

निर्यात को गति देने के लिए कपड़ा, लेदर और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने से जुड़े कदम उठाए गए हैं। इससे इन श्रम-प्रधान क्षेत्रों में कारोबार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

यह भी पढ़ें: Budget 2026: निर्मला सीतारमण के बजट में 8वां वेतन आयोग के लिए क्या खास, कर्मचारियों की कब तक बढ़ेगी सैलरी?

शेयर बायबैक पर अब लगेगा टैक्स

हालांकि, बजट 2026 में एक सख्त फैसला भी लिया गया है। शेयर बायबैक पर अब टैक्स लगाया जाएगा और इसे सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन माना जाएगा। इस बदलाव से निवेशकों पर कर बोझ बढ़ सकता है और कंपनियों की बायबैक रणनीति पर भी असर पड़ने की आशंका है।

Budget 2026 analysis taxpayers to investors and consumers who benefits and suffers

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Published On: Feb 02, 2026 | 04:51 PM

Topics:  

  • Budget 2026
  • Business News
  • Nirmala Sitharaman

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