हादसे से बैकफुट पर आया बोइंग, पेरिस एयर शो में शामिल नहीं हुए कंपनी प्रमुख ऑर्टबर्ग
2018 तक बोइंग कॉमर्शियल एविएशन सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा था और फ्यूल एफिशिएंसी और लंबी दूरी की यात्रा में अग्रणी था। 2016 में लॉन्च किया गया 737 मैक्स इसका प्रतीक माना जाता था।
- Written By: मनोज आर्या
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली: पेरिस में हर साल होने वाला एयर शो परंपरागत रूप से एयरबस और बोइंग के लिए अपने ग्राहकों को लुभाने का मंच रहा है। लेकिन एअर इंडिया के बोइंग 787 की दुर्घटना ने इस साल के शो की चमक फीकी कर दी है। हादसे के बाद बोइंग प्रमुख केली ऑर्टबर्ग ने शो में आने की अपनी यात्रा रद्द कर दी। साथ ही जीई एयरोस्पेस ने भी निवेशकों के साथ प्रस्तावित ब्रीफिंग नहीं की। जीई एयरोस्पेस के इंजन ही इस दुर्घटनाग्रस्त 787 ड्रीमलाइनर में लगे थे। हालांकि अभी तक एअर इंडिया दुर्घटना के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह घटना बोइंग की छवि के लिए नकारात्मक साबित हुई है। यह हादसा बोइंग के लिए पिछले दशक से चली आ रही समस्याओं की एक और कड़ी बन गया है।
बोइंग की गिरती साख
2018 तक बोइंग कॉमर्शियल एविएशन सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा था और फ्यूल एफिशिएंसी और लंबी दूरी की यात्रा में अग्रणी था। 2016 में लॉन्च किया गया 737 मैक्स इसका प्रतीक माना जाता था, लेकिन 2018 और 2019 की दो बड़ी दुर्घटनाओं में मार्च ने 737 मैक्स बेड़े को पूरी दुनिया में 2019 से नवंबर 2020 तक ग्राउंडेड कर दिया। इस दौरान यूरोपीय प्रतिद्वंद्वी एयरबस चुपचाप आगे बढ़ता रहा। एयरबस की खबरें शायद ही कभी सुर्खियों में आई और बोइंग खुद खबर बन गया।
बोइंग के संचालन पर व्यापक असर
ग्राउंड होने का बोइंग के संचालन पर व्यापक असर पड़ा। इसके बाद कोविड महामारी, सुरक्षा जांच, बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी, हड़तालें और प्रबंधन में बदलाव जैसी मुश्किलें सामने आईं। 2019 से 2024 तक बोइंग ने एयरबस के मुकाबले लगभग आधे विमान ही डिलीवर किए। पिछले चार वित्तीय वर्षों में जहां एयरबस को शुद्ध लाभ हुआ, वहीं बोइंग को लगातार घाटा झेलना पड़ा। सांख्यिकीय रूप से हवाई यात्रा अब भी एक सुरक्षित माध्यम है।
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बढ़ती जरूरतें नहीं हो रही पूरी
भारतीय एयरलाइनों में एअर इंडिया और अकासा एयर को इस बात की चुनौती है कि उनके विमान आपूर्तिकर्ता बोइंग उनकी तेजी से बढ़ती जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कुछ हद तक यही स्थिति इंडिगों के साथ भी है, जो लगभग पूरी तरह एयरबस पर निर्भर रहकर भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन बन चुकी है। भारत में इंडिगों की बदौलत एयरबस की संख्या बोइंग की तुलना में लगभग तीन गुना है। 2025 में बोइंग ने रफ्तार पकड़नी शुरू की थी और डिलिवरी के मामले में एयरबस के करीब पहुंच गया था। लेकिन एक बार फिर उसे झटके लगने लगे हैं।
दुर्घटनाओं से प्रभावित हुई बोइंग
बोइंग की दुर्घटनाओं ने इसके संचालन को बुरी तरह प्रभावित किया, क्योंकि 737 मैक्स के डिजाइन में संरचनात्मक खामियां उजागर हुई 2024 में बोइंग की आय लगभग 66.5 अरब डॉलर रही, जो कि 2021 की तुलना में केवल 7% वृद्धि थी। वहीं एयरबस ने 2021 में लगभग 52 अरब यूरो की कमाई की थी, जो 2024 तक बढ़कर 69 अरब यूरो हो गई यानी करीब 33% की बढ़ोतरी। बोइंग की समस्या ऑर्डर में नहीं बल्कि डिलिवरी में है। 2010 के दशक की पहली छमाही में वह एयरबस से आगे या और दूसरी छमाही में लगभग बराबरी पर आ गया। यह उद्योग पूंजी और तकनीक-प्रधान है, जहां ऑर्डर थोक में दिए जाते हैं, लेकिन डिलिवरी एक-एक कर होती है। इसलिए दोनों कंपनियों के डिलिवरी बैकलॉग और ऑर्डर बुक भारी रहती हैं।
