विकसित भारत के रास्ते में पिछड़ी कृषि साबित हो सकती है राह का रोड़ा
बायर दक्षिण एशिया के अध्यक्ष साइमन विबुश ने भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के दावे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि जब तक भारतीय कृषि में आधुनिकीकरण नहीं कर लिया जाता तब तक देश आगे नहीं बढ़ सकता है।
- Written By: अपूर्वा नायक
भारतीय कृषि (सौजन्य : सोशल मीडिया)
पानीपत : भारत लगातार अपने प्रयासों से विकसित देश बनने की ओर अग्रसर हो रहा है, लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा। इस रास्ते पर चलते हुए हमारे देश को कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसी कड़ी में जर्मनी की रसायन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बायर के दक्षिण एशिया परिचालन के प्रमुख ने अपना मत व्यक्त किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के सपने में पिछड़ी कृषि खलल डाल सकती है। अगर 2047 तक भारत विकसित देश बनना चाहता है, तो देश के किसानों को आधुनिकीकरण को अपनाना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने सरकार के द्वारा कृषि में बदलावों के लिए किए जाने वाले प्रयासों की सराहना भी की है।
बायर दक्षिण एशिया के अध्यक्ष साइमन विबुश ने पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में कहा, “पिछड़ी कृषि से आप विकसित राष्ट्र नहीं बन सकते।” उन्होंने कहा, “नई सरकार की ओर से हमें जो अनेक पहल सुनने को मिल रही हैं, वे स्पष्ट रूप से भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण पर केंद्रित हैं।”
नवीन यौगिकों को प्राथमिकता
विबुश ने कहा कि भारत तेजी से विनियामक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर रहा है और नवीन यौगिकों को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन “रातोरात नहीं होता”। नियामकीय देरी के बारे में उन्होंने कहा, “हम अब नए अभिनव यौगिकों को प्राथमिकता देने और तेजी से आगे बढ़ाने के बारे में चर्चा देख रहे हैं। यह एक स्पष्ट संकेत है कि जो हमने अतीत में देखा है वह वह नहीं है जो हम भविष्य में देखेंगे।”
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कीटनाशकों की तुलना में अधिक
बायर दक्षिण एशिया के लिए फसल विज्ञान के ‘कंट्री डिवीजनल हेड’ वीबुश ने कहा कि कंपनी भारत में खरपतवारनाशकों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है, जो कि कृषि में बढ़ती श्रम की कमी को पूरा करने के लिए है। यह कोविड-19 महामारी के बाद से और अधिक गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत में खरपतवारनाशकों में निवेश इस समय कीटनाशकों की तुलना में अधिक है।
कृषि में श्रमिकों की कमी
विवुश ने कहा, “हम भारत में कृषि में श्रमिकों की कमी देख रहे हैं। इसका मतलब हमें उन खरपतवारों से निपटने के लिए अधिक खरपतवारनाशकों की आवश्यकता है जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं जैसे साइपरस रोटंडस, सिनोडोन डेक्टीलॉन और फालारिस माइनर।”
मौजूदा खरपतवारनाशक अभी भी प्रभावी
उन्होंने कहा कि हालांकि भारत में ऐतिहासिक रूप से कम उपयोग के कारण मौजूदा खरपतवारनाशक अभी भी प्रभावी हैं, लेकिन कंपनी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी कर रही है, क्योंकि खरपतवारों में इनके प्रति प्रतिरोध विकसित हो रहा है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
