मुंबई: विकसित देशों के बाद अब भारत में भी एंजल फंड (Angel Funds) यानी एंजल इन्वेस्टर्स प्रचलित होने लगे हैं। आमतौर पर एचएनआई (HNI) यानी हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स मिलकर अथवा कंपनियां एंजल फंड बनाते हैं। ये एंजल फंड लंबे समय के लिए उभरते हुए नए स्टार्टअप्स (Startups) में निवेश कर उसे ग्रोथ करने में मदद करते हैं। स्टार्टअप्स की ग्रोथ (Growth) के साथ एंजल फंड की निवेश वैल्यू (Investment Value) भी बढ़ती जाती हैं। इस तरह एंजल फंड एक अच्छी वेल्थ (Wealth) बनाने में सफल होते हैं और फिर उस लाभ (Profit) को अपने निवेशकों (Investors) में वितरित (Distribute) करते है। पूंजी बाजार नियामक ‘सेबी’ (SEBI) ने एंजल फंडों को वेंचर कैपिटल फंडों की सब-कैटेगरी के रूप में मान्यता दी है। ये सेबी के नियमों के तहत संचालित होते हैं। पहले एंजल फंडों में केवल बड़े धनी निवेशक, जिन्हें एचएनआई कहते हैं, ही इन्वेस्टमेंट करते थे क्योंकि इनमें बड़ी राशि निवेश होती है, परंतु अब छोटे निवेशकों (Small Investors) के लिए भी इनमें निवेश का रास्ता खुल गया है। यह रास्ता एंजल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (Angel Investment Platforms -AIP) के माध्यम से खुलता है।
एआईपी व्यक्तिगत निवेशकों को स्टार्टअप कंपनियों से जोड़ते हैं, जो शुरुआती कैपिटल की फंडिंग की मांग करते हैं। भारत में कई एंजल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म लोकप्रिय होने लगे हैं। जिनमें एंजललिस्ट इंडिया, आह वेंचर्स, मुंबई एंजल नेटवर्क, चेन्नई एंजल्स, वेंचर कैटालिस्ट्स, इंडियन एंजल् नेटवर्क, लेट्स वेंचर, लीड एंजल्स नेटवर्क मुख्य हैं। ये प्लेटफॉर्म 20,000 रुपए की छोटी रकम से लेकर 3 लाख रुपए तक निवेश की सुविधा प्रदान करते हैं। निवेशकों के बीच एआईपी निवेश के एक नए बेहतर माध्यम के रूप में प्रचलित हो रहा है और यह कुछ जोखिम के साथ अधिक फायदा देने की क्षमता भी रखते हैं, लेकिन जैसा कि हर निवेश माध्यम में निवेशकों को सोच-विचार कर और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही और यह निवेश करना चाहिए, उसी तरह एआईपी में भी निवेश से पहले इसके लाभ और जोखिम के सभी पहलुओं पर विश्लेषण करना जरूरी है। तभी इसका पूरा फायदा मिल सकता है। इनमें निवेश से पहले 7 प्रमुख बातों पर गौर करना सही होगा।
आप स्टार्टअप में शेयरधारक बनने के लिए सीधे निवेश कर सकते है या एआईपी प्लेटफॉर्म पर जो निवेशकों के कुल निवेश के लिए एक पूलिंग वाहन होता है, का उपयोग कर सकते है और उसके बाद सभी शेयरधारकों की ओर से इस वाहन के माध्यम से निवेश कर सकते है। यदि इस तरह के एक निवेश वाहन का उपयोग किया जाता है, तो निवेशकों को वाहन के प्रकार को विनियामक निहितार्थों के साथ समझना चाहिए जैसे कि एंजल फंड निवेशक के लिए एक या कई स्टार्टअप में पांच साल की अवधि में न्यूनतम निवेश प्रतिबद्धता 25 लाख रुपए है। इसके अलावा, सभी प्रकार की संस्थाओं को एंजल फंड के माध्यम से निवेश करने की अनुमति नहीं है और यदि निवेशक इस अनुमति सूची से बाहर है तो तदनुसार निवेश नहीं हो सकता है।
एंजल निवेश बहुत अधिक रिटर्न देने की बड़ी क्षमता के साथ आते हैं, लेकिन एक निवेशक को यह समझने की जरूरत है कि सकल रिटर्न उनके शुद्ध रिटर्न से काफी अलग हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐसे निवेशों से जुड़ी लागत या खर्चे सूचीबद्ध निवेशों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक हैं। इन खर्चों में सेटअप शुल्क, वार्षिक प्रबंधन शुल्क, प्लेटफॉर्म का वार्षिक सदस्यता शुल्क और बाहर निकलने के समय लाभ का हिस्सा शामिल हो सकते हैं। एक सरल उदाहरण के रूप में, यदि निवेश मंच 20% लाभ शेयर (या कैरी) चार्ज करता है और निकास 2 गुना या 100% रिटर्न पर होता है तो लाभ शेयर का रिटर्न नेट 80% रह जाता है।
एंजल निवेश लंबी अवधि के निवेश होते हैं जिन्हें 8 से 10 साल तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस अवधि के दौरान स्टार्टअप के साथ कई घटनाएं हो सकती हैं जो निवेश को प्रभावित कर सकती हैं। यह महत्वपूर्ण है कि एक निवेशक मंच की जिम्मेदारियों और इन निवेशों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के अपने अधिकारों को समझना जरूरी है।
निवेशकों को राउंड में स्टार्टअप के वैल्यूएशन को भी समझना चाहिए जिसमे उनका हिस्सा पोस्ट-मनी वैल्यूएशन के प्रतिशत के रूप में होता है। इसके अलावा, यह आमतौर पर प्रारंभिक या ब्रिज राउंड होता है जो एंजल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है, जहां संस्थागत वीसी राउंड की तुलना में कुल वृद्धि कम होती है। इस तरह के दौरों को तेजी से बंद करने के लिए, संस्थापक इक्विटी शेयरों के बजाय डिबेंचर या वरीयता शेयरों जैसे परिवर्तनीय उपकरणों के माध्यम से धन जुटाना पसंद कर सकते हैं। ऐसे मामलों में, रूपांतरण ट्रिगर जैसे रूपांतरण की शर्तों को समझना महत्वपूर्ण है।
प्रत्येक निवेश के साथ, एक निवेशक को लेखांकन और कर उद्देश्यों के साथ-साथ अपने निवेश के संबंध में नियमित अपडेट प्राप्त करने के लिए प्रासंगिक दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। निवेशकों के लिए आवश्यक अनुपालन और अपडेट को सक्षम करने के लिए उचित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना निवेश मंच की जिम्मेदारी है।
यह जानना जरुरी है कि एंजल इन्वेस्टमेंट जितने आकर्षक हैं, इनमे काफी बड़ा जोखिम भी होता है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि स्टार्टअप का व्यवसाय नहीं चल पाता है और रुक जाता है, तो इक्विटी धारक अपने निवेश पर किसी भी राशि की वसूली नहीं कर सकते हैं, जिससे इक्विटी निवेश पूरी तरह से राइट ऑफ हो जाता है।
एंजल निवेश नवीनतम रुझानों में भाग लेने और कुछ अनूठे, विघटनकारी व्यवसायों का हिस्सा बनने का एक अच्छा तरीका है। अगर सही तरीके से योजना बनाई जाए तो वे निवेशक के पोर्टफोलियो के लिए अत्यधिक मूल्य बना सकते हैं। इसलिए निवेशक के लिए पहले सभी पहलुओं पर विचार करना उचित होगा।
टेलविंड फाइनेंशियल सर्विसेज (Tailwind Financial Services) के सह-संस्थापक विवेक गोयल (Vivek Goel) का कहना है कि एंजल इन्वेस्टमेंट एक प्रकार की फंडिंग है, जहां स्टार्टअप्स में पूर्व अनुभव वाले धनी व्यक्ति इक्विटी के बदले नवोदित स्टार्टअप में निवेश करते हैं। भारत में एंजल निवेश की कम्युनिटी 26,000 से अधिक है। एंजल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (AIP) निवेशकों को स्टार्टअप कंपनियों से जोड़ते हैं जो शुरुआती चरण की फंडिंग की मांग करते हैं। हालांकि, भले ही ये निवेश उच्च प्रतिफल देने की जबरदस्त क्षमता रखते हैं, लेकिन कुछ जोखिम भी हैं। जिन पर विचार कर निवेश किया जाए तो निश्चित ही एआईपी में निवेश लाभकारी होने की संभावना अधिक हो जाती है। इनमें निवेश 5 से 8 वर्षों की लंबी अवधि के लिए होता है और प्रमुख एआईपी के प्रतिफल को देखा जाए तो इनमें 20 से 25 प्रतिशत का वार्षिक रिटर्न (Return) मिल रहा है।