मंदी के कगार पर अमेरिका! कोरोना महामारी से भी बुरा हाल; खतरे में लोगों की नौकरियां
American Economy: ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी ने कहा कि राज्यवार आंकड़ों का अध्यन करने के बाद यह स्पष्ट दिख रहा है कि अमेरिका एक बार फिर मंदी के मुहाने पर खड़ा हुआ है
- Written By: मनोज आर्या
मंदी के कगार पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था, (कॉनसेप्ट फोटो)
Recession In American Economy: ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का सपना लेकर दूसरी बार अमेरिकी सत्ता में लौटे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी टैरिफ नीति से पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर चुके हैं। ट्रंप व्यापारिक साझेदार देशों पर टैरिफ लगाकर अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि उनका ये दावं उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका फिलहाल मंदी के मुंह पर खड़ा है।
वर्तमान समय में अमेरिकी इकोनॉमी पर जारी प्रेशर कोरोना महामारी से भी ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है। अगर बिना देर किए हुए तत्काल कोई उपाय नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा असर अमेरिका में नौकरियों पर दिखेगा।
साल 2008 में महामंदी की भविष्यवाणी कर चुके हैं जैंडी
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी का कहना है कि राज्यवार आंकड़ों का अध्यन करने के बाद यह स्पष्ट दिख रहा है कि अमेरिका एक बार फिर मंदी के मुहाने पर खड़ा हुआ है। जैंडी ने साल 2008 की महामंदी की सबसे पहले भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा कि आंकड़ों में कोरोना महामारी से भी ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। अमेरिका की इकोनॉमी में राज्यों की भागीदारी करीब एक तिहाई से भी अधिक है और ये आंकड़े दर्शाते हैं कि उनका प्रोडक्शन या तो घटना शुरू हो गया है अथवा गिरावट की कगार पर है।
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अमेरिकी अर्थव्यवस्था का मौजूदा हाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में जैंडी ने लिखा कि इकनॉमी में 33% का हिस्सा रखने वाले राज्यों की हालत खराब है। कई राज्य पूरी तरह से मंदी की चपेट में आ चुके हैं तो कुछ मंदी के मुहाने पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अक बार फिर अमेरिकी अर्थव्यवस्था बड़ी मंदी की चपेट में आने वाली है। इससे पहले साल 2008 में भी मंदी की शुरुआत अमेरिका से ही हुई थी। तब भी जैंडी ने ही सबसे पहले मंदी का अनुमान लगाया था।
अमेरिकी नागरिकों पर दोहरा संकट
मूडीज के चीफ इकोनॉमिस्ट ने आगे कहा कि यह मंदी अमेरिकी नागरिकों पर दोहरा संकट लेकर आएगी। पहला- देश की भीतर महंगाई बढ़ने से लोगों के जरूरत की चीजें महंगी हो जाएंगी। दूसरा- देश के अलग-अलग सेक्टर की ज्यादातर नौकरियों पर संकट पैदा होगा। गौरतलब ही कि कमाई घटने और खर्चे बढ़ने की स्थिति में देश के लोगों पर बड़ा संकट छा जाएगा। उनका कहना है कि कि इन दोनों ही संकटों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। कई चीजें की कीमतें अभी से बढ़नी शुरू हो गई हैं और आम आदमी पर इसका असर दिखना भी शुरू हो गया है।
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अमेरिका अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत
मार्क जैंडी ने कहा कि अमेरिका में महंगाई दर अभी 2.7% के करीब है, जो आने वाले समय में 4% तक जा सकती है। इससे लोगों की पर्चेजिंग पॉवर प्रभावित होगी। वहीं, जॉब मार्केट के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2020 यानी कोविड महामारी के बाद यह पहला ऐसा अवसर है, जब 3 महीने के आंकड़े सबसे सुस्त दिखे हैं। साल 2025 में हर महीने जॉब का औसत आंकड़ा 85 हजार के आसपास है, जो कोविड के दौर में भी 1.75 लाख के करीब था। इससे पता चलता है कि हालात अभी कोविड महामारी से भी बुरे दौर में हैं।
