एएफएफआई ने की सरकार से मांग, सेब पर लगे 100 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी
कश्मीर में आयोजित एक कार्यक्रम में सेब किसानों ने सरकार के सामने मांग रखी है, कि सेब के आयात पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की बात कही है। साथ ही इन किसानों ने आम आदमी के सेब लेने में असमर्थ होने की भी बात बतायी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
कश्मीरी सेब ( सौजन्य : सोशल मीडिया )
श्रीनगर : भारत के सबसे खुबसूरत प्रदेशों में से एक कश्मीर जितना अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है, उतना ही जाना जाता है एक और चीज के लिए वो है कश्मीरी सेब। कश्मीर के सेब का स्वाद सबसे अलग होता है, लेकिन इसी सेब को लेकर अब एएफएफआई ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग कर दी है। ये बात कश्मीर जिले में सेब किसानों के राष्ट्रीय सम्मेलन में कही गई है।
रविवार को भारतीय सेब किसान संघ ने बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि, ‘स्थानीय किसानों को बचाने के लिए’ सेब की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा देनी चाहिए। अब सेब के आयात पर 100 प्रतिशत तक की आयात शुल्क लगनी चाहिए।
सेब किसानों के राष्ट्रीय सम्मेलन में कही बात
कुलगाम जिले में सेब किसानों के राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए माकपा नेता एम वाई तारिगामी ने कहा कि सरकार को सेब उद्योग का निगमीकरण रोकना चाहिए और स्थानीय किसानों को बचाने के लिए 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाना चाहिए।
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खुदरा मूल्य का 50 प्रतिशत न्यूनतम खरीद मूल्य
तारिगामी ने कहा कि सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें मांग की गई कि खुदरा मूल्य का 50 प्रतिशत न्यूनतम खरीद मूल्य के रूप में भुगतान किया जाए। एएफएफआई सम्मेलन ने नकली कीटनाशकों और उर्वरकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आह्वान के अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र में इनके लिए बीमा कवरेज की भी मांग की।
आयात शुल्क को 70 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत करे
उन्होंने मांग की कि किसानों को सीधे रियायती दरों पर भंडारण सुविधाएं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “सरकार कॉरपोरेट कंपनियों को वाणिज्यिक किराए पर चलाने के लिए नियंत्रित वातावरण भंडार (सीएएस) बनाने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है।”एएफएफआई के राष्ट्रीय समन्वयक राकेश सिंघा ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ आयात शुल्क को 70 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा।
आम लोग सेब लेने में असमर्थ
सिंघा ने कहा, “सेब उद्योग के निगमीकरण के कारण आम लोग सेब लेने में असमर्थ हैं।” उन्होंने किसानों के लिए खरीद मूल्य के रूप में खुदरा मूल्य का 50 प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए मूल्य नीति की मांग की।
( एजेंसी इनपुट के साथ )
