गौतम अदाणी का समधी निकला घोटालेबाज… सरकार को लगाया है करोड़ो का चूना, अब लंदन में बिता रहा ऐश की जिंदगी
80:20 Gold Import Export Scheme: यूपीए सरकार में शुरू हुई विवादित 80:20 गोल्ड इंपोर्ट-एक्सपोर्ट स्कीम पर कैग (CAG) ने बड़े सवाल उठाए हैं, जिससे विदेशी मुद्रा की कमाई के बजाय देश को भारी नुकसान हुआ।
- Written By: अक्षय साहू
गौतम अदाणी के भाई विनोद अदाणी के समधी हैं जतिन मेहता (सोर्स- सोशल मीडिया)
Jatin Mehta-Vinod Adani Gold Scheme Scam: गोल्ड इंपोर्ट-एक्सपोर्ट स्कीम कांग्रेस की यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) सरकार में शुरू हुई थी और नरेंद्र मोदी सरकार के छह महीने तक चलती रही। यह स्कीम एक घोटाला थी, जिसे भारत के कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) ने भी बड़े पैमाने पर माना है। कई कंपनियों ने इस विवादित स्कीम के तहत सोने का इंपोर्ट और एक्सपोर्ट किया।
इनमें से एक थी भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता की ‘विंसम डायमंड्स’, जो गौतम अदाणी के बड़े भाई विनोद शांतिलाल अदाणी के समधी हैं। जतिन मेहता के बेटे सूरज मेहता की शादी विनोद अदाणी की बेटी कृपा के साथ हुई है। अदाणी समूह से संबंधित कुछ जांचों और हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट्स में जतिन मेहता और विनोद अदाणी के बीच ऑफ-शोर फंड्स के जरिए लेन-देन के आरोप लगाए गए थे। सबसे बड़ी बात इस स्कीम से राजेश मेहता का नाम भी जुड़ा हुआ है।
क्या है 80:20 गोल्ड इम्पोर्ट एक्सपोर्ट स्कीम?
कई ऐसे फाइनेंशियल और कानूनी मुद्दे हैं जो 80:20 गोल्ड इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट स्कीम के बनने के समय ही सामने आने चाहिए थे। अप्रैल 2019 में पीएसी की सब-कमेटी की एक ड्राफ्ट रिपोर्ट में खास तौर पर यूपीए सरकार द्वारा 21 मई 2014 को स्कीम में किए गए एक बदलाव पर ध्यान दिया गया, यह बदलाव 16 मई 2014 को 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए की जीत के कुछ दिनों बाद हुआ, लेकिन 5 दिन बाद 26 मई को औपचारिक रूप से पद संभालने से पहले किया गया था।
सम्बंधित ख़बरें
गहने खरीदने वालों की लगी लॉटरी… 5800 तक सस्ती हुई चांदी, सोना भी 1850 रुपए फिसला, चेक करें लेटेस्ट रेट
मैरियट-रेडिसन कॉरिडोर पर इंदौर पुलिस का ड्रोन सर्विलेंस, कानून व्यवस्था के लिए ड्रोन से हाईटेक निगरानी शुरू
Adani Ports: मुंद्रा पोर्ट से दुनिया तक…APSEZ ने कैसे खड़ा किया भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स साम्राज्य?
कारधा पुराने टोल के पास से गायब हुआ ट्रक, कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज
इस बदलाव से बड़े एक्सपोर्टर्स को भी स्कीम का फायदा उठाने की इजाजत मिल गई। आरोप है कि 80:20 गोल्ड इम्पोर्ट एक्सपोर्ट स्कीम में किए गए बदलावों ने इनवॉइस में हेरफेर करके काले धन की राउंड-ट्रिपिंग को आसान बना दिया, कहा जाता है कि इस बदलाव की वजह से स्कीम का गलत इस्तेमाल हुआ। यह स्कीम सोने और गहनों के एक्सपोर्ट से विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी।
यह भी पढ़ें- गहने खरीदने वालों की लगी लॉटरी… 5800 तक सस्ती हुई चांदी, सोना भी 1850 रुपए फिसला, चेक करें लेटेस्ट रेट
फायदे की जगह नुकसान कर गई स्कीम
कैग ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की है कि 80:20 स्कीम की कोई जरूरत नहीं थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि सोने के एक्सपोर्ट से भारत को जितनी विदेशी मुद्रा मिली, उससे कहीं ज्यादा नुकसान एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को छूट देने के कारण हुआ। यह छूट ट्रेडिंग कंपनियों को कस्टम ड्यूटी और अन्य टैक्स के भुगतान पर दी गई थी। कैग रिपोर्ट के साथ जारी प्रेस रिलीज में और भी कड़ी बातें कही गई थीं।
