ITR रिफंड में देरी: लाखों टैक्सपेयर्स परेशान, जानें कहां अटक रहा है आपका पैसा
ITR Refund Delay: ITR रिफंड में देरी के पांच मुख्य कारण हो सकते हैं, गलत बैंक डिटेल, अतिरिक्त जांच के लिए हाई-वैल्यू क्लेम, बैंक अकाउंट का बंद होना, लंबित टैक्स डिमांड और ITR में डेटा मिसमैच/गलती।
- Written By: प्रिया सिंह
ITR रिफंड (सोर्स- सोशल मीडिया)
5 Big Reasons For ITR Refund Delay: इन दिनों देशभर में लाखों टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिफंड का इंतजार है। पोर्टल पर बार-बार स्टेटस चेक करने के बावजूद रिफंड न आने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। दरअसल, आपकी एक छोटी-सी गलती या विभाग की तरफ से होने वाली जांच इस प्रक्रिया को धीमा कर देती है। हम यहां उन 5 मुख्य कारणों पर एक नजर डाल रहे हैं, जिनकी वजह से आपका ITR रिफंड अटक सकता है।
गलत बैंक या PAN डिटेल
इनकम टैक्स रिफंड में देरी का सबसे बड़ा और आम कारण गलत जानकारी देना है। यदि आपने ITR भरते समय अपना बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड या PAN जैसी कोई भी जानकारी गलत दर्ज कर दी है, तो विभाग रिफंड जारी नहीं कर पाएगा। गलत डिटेल की वजह से रिफंड की प्रोसेसिंग वहीं रुक जाती है। टैक्सपेयर को सही डिटेल अपडेट करने के लिए दोबारा ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर यह गलती सुधारनी पड़ती है, जिससे देरी होना तय है।
हाई-वैल्यू क्लेम पर अतिरिक्त जांच
अगर आपने अपने ITR में बहुत ज्यादा रिफंड क्लेम किया है (जैसे ₹1 लाख से अधिक) या यदि आपके पास विदेशी आय, कैपिटल गेन या कई अलग-अलग इनकम सोर्स हैं, तो विभाग आपके रिटर्न की मैन्युअल जांच करता है। इसे ‘स्क्रूटनी’ कहते हैं। यह जांच यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि आपका क्लेम पूरी तरह से वैध है। इस तरह की गहन जांच में काफी समय लग सकता है, जिससे आपके रिफंड की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
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बैंक अकाउंट बंद या प्री-वैलिडेशन फेल
रिफंड केवल उसी बैंक अकाउंट में आता है जो एक्टिव हो और ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘प्री-वैलिडेटेड’ हो। अगर आपका बैंक अकाउंट बंद हो गया है या ‘डोरमैट’ है या फिर आपने प्री-वैलिडेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की है, तो रिफंड ऑटोमैटिकली फेल हो जाएगा। इस स्थिति में, टैक्सपेयर को अकाउंट को एक्टिव करना और पोर्टल पर उसे दोबारा प्री-वैलिडेट कराना जरूरी होता है।
लंबित टैक्स डिमांड या ई-वेरिफिकेशन में देरी
अगर किसी टैक्सपेयर पर कोई पुराना टैक्स बकाया (टैक्स डिमांड) लंबित है, तो इनकम टैक्स विभाग पहले उस बकाए को साफ करने के बाद ही रिफंड जारी करता है। इसके अलावा, ITR फाइल करने के बाद 30 दिन के अंदर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। अगर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया जाता है, तो रिटर्न प्रोसेस ही नहीं होता और देरी का सबसे बड़ा कारण बन जाता है।
डेटा मिसमैच या ITR में गलती
अगर आपके रिटर्न में भरी गई जानकारी, विभाग के पास मौजूद 26AS, AIS या TIS डेटा से मेल नहीं खाती है, तो रिफंड रोक दिया जाता है। अगर ITR में कोई गंभीर गलती पाई जाती है, तो रिटर्न को “डिफेक्टिव” घोषित कर दिया जाता है और जब तक वह गलती सुधारी नहीं जाती, प्रोसेसिंग आगे नहीं बढ़ती। ऐसी स्थितियों में आपको विभाग से सेक्शन 154 के तहत नोटिस भी मिल सकता है।
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आगे क्या करें?
अगर आपके रिफंड में देरी हो रही है, तो तुरंत ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करें। ‘View Filed Returns’ सेक्शन में जाकर स्टेटस चेक करें। अगर कोई नोटिस, पेंडिंग एक्शन या डेटा मिसमैच दिख रहा है, तो बिना देर किए उसे ठीक करें।
