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बिहार में होगा ‘शराबबंदी’ का काम तमाम? हर साल हो रहा 3 हजार करोड़ का नुकसान, NDA नेताओं की नीतीश से बड़ी मांग

Bihar News: बिहार में दस साल से लागू शराब बैन पर फिर से सोचने की मांग सत्ताधारी गठबंधन में फिर से उठने लगी है। NDA के सहयोगी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पॉलिसी का रिव्यू करने को कहा है।

  • Written By: अभिषेक सिंह
Updated On: Feb 18, 2026 | 08:55 PM

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Liquor Ban in Bihar: बिहार में दस साल से लागू शराब बैन पर फिर से सोचने की मांग सत्ताधारी गठबंधन में फिर से उठने लगी है। NDA के सहयोगी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पॉलिसी का रिव्यू करने को कहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि शराबबंदी का नियम गलत नहीं है, बल्कि इसे लागू करने में खामियां हैं।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक ताजे बयान में कहा है कि हम लंबे समय से कह रहे हैं कि शराब पॉलिसी गलत नहीं है और शराबबंदी लागू होनी चाहिए। हालांकि, इसे लागू करने में खामियां हैं। मांझी ने कहा कि हमारे राज्य में एनफोर्समेंट ऑफिसर सिर्फ उन्हीं को गिरफ्तार करते हैं जो शराब के लिए जिम्मेदार होते हैं।

‘बिहार को हो रहा फाइनेंशियल नुकसान’

उन्होंने आगे कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर शराब की तस्करी करने वालों को रिश्वत लेकर छोड़ दिया जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक्शन लेना चाहिए। शराबबंदी से बिहार सरकार को भारी फाइनेंशियल नुकसान हो रहा है और नीतीश कुमार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

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सालाना होती थी 3 हजार करोड़ की कमाई

2016 में जब नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार थी के दौरान शराबबंदी लागू की गई थी। इससे 8.43 लाख से ज्यादा केस दर्ज हुए हैं और करीब 1.28 मिलियन गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन रेवेन्यू की चिंताएं बढ़ गई हैं। बैन से पहले बिहार शराब की बिक्री से हर साल 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाता था।

साल-दर-साल बढ़ रहा बिहार का खर्च

महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर, ज्यादा पेंशन और बिजली सब्सिडी जैसी नई वेलफेयर स्कीमों पर 28,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने की उम्मीद है। राज्य की खराब फाइनेंशियल हालत को देखते हुए NDA के अंदर सवाल उठ रहे हैं कि क्या बैन टिकाऊ है। पिछले साल बिहार का फिस्कल डेफिसिट उसके ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) का 9.2% था।

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माधव आनंद ने की समीक्षा की मांग

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के MLA माधव आनंद ने असेंबली में कानून के ‘विस्तृत समीक्षा’ की मांग की। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून को लागू हुए 10 साल हो गए हैं। इन दस सालों में क्या मिला और क्या खोया, इसका असेसमेंट होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि शराब अभी भी होम डिलीवरी के ज़रिए मिल रही है और युवाओं में ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ा है।

Will bihar liquor ban to end nda leaders demand review as state loses 3000 crore annually

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Published On: Feb 18, 2026 | 08:55 PM

Topics:  

  • Bihar News
  • Liquor Ban
  • Nitish Kumar

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