कहां गए तेजस्वी की लुटिया डुबाने वाले संजय? तेजप्रताप जिसे कहते हैं 'जयचंद'!
Sanjay Yadav – Tejaswi Yadav News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे लगभग सामने आ चुके हैं। बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को बड़ा झटका दिया है। 14 नवंबर को सुबह 10.45 बजे जो रुझान दिखाई दे रहे हैं, उसमें महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम) 54 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है, जबकि एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) 185 सीटों पर मजबूत स्थिति में दिख रहा है। ताज़ा रुझानों में तेजस्वी खुद अपनी सीट पर पीछे चल रहे हैं।
साफ तौर पर लगता है कि बिहार की जनता ने महागठबंधन और तेजस्वी यादव को हराया ही नहीं, बल्कि एक तरह से खारिज कर दिया है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा किसी की हो रही है तो वो हैं संजय यादव। जी हां, वही संजय यादव जो चुनाव से पहले लालू परिवार में हुए कलह से चर्चा में आए थे।
बता दें कि संजय यादव का नाम बिहार की राजनीति में हाल के वर्षों में तेजी से उभरकर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नांगल सिरोही गांव से ताल्लुक रखने वाले संजय यादव ने कंप्यूटर साइंस में एमएससी और एमबीए की डिग्री हासिल की है। पहले संजय दिल्ली में एक आईटी कंपनी में काम करते थे।
इसी दौरान उनकी मुलाकात तेजस्वी यादव से हुई, जब वह (तेजस्वी यादव) क्रिकेट खेला करते थे। दोनों की दोस्ती की शुरुआत क्रिकेट के मैदान से हुई थी। वर्ष 2012 में जब लालू यादव जेल गए और तेजस्वी ने क्रिकेट छोड़कर पटना लौटने का फैसला किया, तब संजय यादव ने भी अपनी नौकरी छोड़ दी और तेजस्वी के साथ बिहार आ गए। इसके बाद संजय यादव ने तेजस्वी यादव के ‘राजनीतिक रणनीतिकार’ या ‘सलाहकार’ के रूप में काम करना शुरू कर दिया।
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तेज प्रताप लगातार तेजस्वी पर निशाना साध रहे थे। विशेष रूप से, उन्होंने तेजस्वी के खास सहयोगी संजय यादव को भरे मंचों से कई बार ‘जयचंद’ कहकर संबोधित किया है। चुनाव प्रचार के दौरान, एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ था। ये वीडियो यूट्यूबर समदीष भाटिया के चैनल ‘अनफिल्टरर्ड बाय समदीष’ पर दिए गए तेज प्रताप के एक इंटरव्यू का हिस्सा था।
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वीडियो में, तेज प्रताप अपनी बस में बैठे हैं और वो सभा के लिए जा रहे हेलीकॉप्टर के पास से गुजरते हैं। तभी उनकी नज़र हेलीकॉप्टर में बैठे तेजस्वी यादव और संजय यादव पर पड़ती है और जैसे ही तेज प्रताप दोनों को देखते हैं, वो चौंककर अपने सहयोगी से कहते हैं, “अरे इसमें तो जयचंदवा भी बैठा हुआ है।”