Ruchi Tiwari UGC Controversy News: यूजीसी और वैचारिक मतभेदों के नाम पर देश के शैक्षणिक संस्थानों में गिरती मर्यादा की दो झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां लड़कियों को सरेआम रेप और मर्डर की धमकियां दी जा रही हैं। पहली घटना में एक पुलिस थाने के अंदर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में एक युवती को सरेआम कपड़े उतारने की धमकी दी गई, जबकि दूसरी तस्वीर में रुचि तिवारी नामक छात्रा को कुछ लोगों ने घेरकर उसे अपमानित किया और उसके सरनेम को लेकर निशाना बनाया। रुचि तिवारी ने आरोप लगाया है कि उसे सोशल मीडिया पर हजारों की संख्या में रेप थ्रेट्स मिल रहे हैं और उसकी निजी जानकारी जैसे फोन नंबर और घर का पता सार्वजनिक कर दिया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे भीड़ के बीच लड़कियां और पुरुष एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए शारीरिक हमलों और भद्दी टिप्पणियों का सहारा ले रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि समाज में जाति और सरनेम की राजनीति इंसानियत पर हावी होती जा रही है, जहाँ असहमत विचारों को तर्क के बजाय हिंसा और धमकियों से दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन और पुलिस की मूकदर्शक भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर सार्वजनिक स्थलों और थानों में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं।
Ruchi Tiwari UGC Controversy News: यूजीसी और वैचारिक मतभेदों के नाम पर देश के शैक्षणिक संस्थानों में गिरती मर्यादा की दो झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां लड़कियों को सरेआम रेप और मर्डर की धमकियां दी जा रही हैं। पहली घटना में एक पुलिस थाने के अंदर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में एक युवती को सरेआम कपड़े उतारने की धमकी दी गई, जबकि दूसरी तस्वीर में रुचि तिवारी नामक छात्रा को कुछ लोगों ने घेरकर उसे अपमानित किया और उसके सरनेम को लेकर निशाना बनाया। रुचि तिवारी ने आरोप लगाया है कि उसे सोशल मीडिया पर हजारों की संख्या में रेप थ्रेट्स मिल रहे हैं और उसकी निजी जानकारी जैसे फोन नंबर और घर का पता सार्वजनिक कर दिया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे भीड़ के बीच लड़कियां और पुरुष एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए शारीरिक हमलों और भद्दी टिप्पणियों का सहारा ले रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि समाज में जाति और सरनेम की राजनीति इंसानियत पर हावी होती जा रही है, जहाँ असहमत विचारों को तर्क के बजाय हिंसा और धमकियों से दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन और पुलिस की मूकदर्शक भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर सार्वजनिक स्थलों और थानों में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं।