

Prashant Kishor Political Journey: बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की बड़ी जीत हुई है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों से हराया। चुनाव आयोग की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, प्रशांत किशोर को कुल 64,151 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार के पाले में केवल 44,827 वोट आए। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा कुमारी को 14,273 वोट मिला। बांकीपुर को भाजपा का गढ़ माना जाता था, जहां इस बार प्रशांत किशोर ने भगवा पार्टी को करारी शिकस्त दी है।
पटना के बांकीपुर में हुए उलट-फेर के बाद प्रशांत किशोर सुर्खियों में हैं। हर-तरफ उनकी ही चर्चा हो रही है। हालांकि, बांकीपुर का जीत प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जनसुराज के लिए आसान नहीं था। लेकिन, सिर्फ 30 दिनों की कड़ी मेहनत और क्षेत्र के मतदाताओं के बीच उनकी जमीनी रणनीति ने नतीजे बदलकर रख दिया। चुनाव से पहले ही प्रशांत किशोर बांकीपुर में जम गए थे और उन मुद्दों को उठा रहे थे, जो कि पिछले कई सालों में नहीं बदला। आइए जानते हैं अब तक उनका सियासी सफर कैसा रहा।
प्रशांत किशोर पूर्व में एक राजनीतिक रणनीतिकार रह चुके हैं। राजनीति में आने और एक रणनीतिकार के तौर पर काम करने से पहले उन्होंने आठ साल तक यूनाइटेड नेशंस के फंडेड प्रोग्राम में पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में काम किया है। प्रशांत किशोर बीजेपी, जदयू, आम आदमी पार्टी, आईएसआरसीपी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक पार्टियों के लिए एक सफल रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके हैं। उनका पहला बड़ा पॉलिटिकल कैंपेन 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात विधानसभा 2012 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने में मदद करना था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने बीजेपी के लिए काम किया था।
साल 2013 में किशोर ने 2014 लोकसभा चुनाव की तैयारी में मीडिया और प्रचार कंपनी सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) की शुरुआत की। प्रशांत किशोर और उनकी टीम को नरेंद्र मोदी के लिए एक इनोवेटिव मार्केटिंग एंड एडवरटाइजिंग कैंपेन 'चाय पे चर्चा' तैयार करने का श्रेय दिया जाता है। इसके अलावा उन्होंने 3 डी रैलियां, रन फॉर यूनिटी, मंथन और कई सोशल मीडिया कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसका चुनाव में फायदा मिला।
साल 2015 में प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन को बिहार विधानसभा चुनाव जीतने में मदद की। इसके बाद 16 सितंबर 2018 को जनता दल (यूनाइटेड) ने उन्हें उपाध्यक्ष बना दिया। इसके बाद प्रशांत किशोर ने I-Pac की नींव रखी और फिर 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के लिए रणनीति बनाए और फिर से उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाए। बिहार चुनाव जीतने पर,मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें योजना और कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए अपने सलाहकार के रूप में नामित किया।
2024 में उन्होंने बिहार में जन सुराज पार्टी शुरू की और 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव में 238 सीटों पर लड़ा। हालांकि, पार्टी के एक भी उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल नहीं रहें। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर उस समय चुनाव नहीं लड़े थे। उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार के लिए चुनावी रणनीति और प्रबंधन की जिम्मेदारी की बात कहते हुए चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।
हालांकि, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद बांकीपुर में हुए उपचुनाव में ‘पीके’ ने पूरी दमखम के साथ चुनावी मैदान में खुद उतरा और पिछले तीन दशकों से भाजपा का अभेद्द किला रहा बांकीपुर को फतह करने के करीब पहुंच गए।