सिर्फ ₹1 में ईशा फाउंडेशन को दी जा रही श्मशान की जमीन, सम्राट सरकार के इस फैसले पर बिहार में क्यों मचा बवाल?
Isha Foundation: पटना के 89 करोड़ से बने आधुनिक शवदाह गृह को ईशा फाउंडेशन को 1 रुपये की लीज पर देने पर विवाद। विपक्ष ने इसे निजीकरण और महंगा करार दिया, फाउंडेशन ने बताया सेवा मॉडल। जानें पूरी सच्चाई।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
पटना का हाईटेक बांसघाट शवदाह गृह (सोर्स- सोशल मीडिया)
Patna Bansghat Crematorium Controversy: पटना के ऐतिहासिक बांसघाट पर बने बिहार के सबसे आधुनिक और हाईटेक शवदाह गृह को ईशा फाउंडेशन को सौंपे जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पटना स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 89.40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक शवदाह गृह का संचालन और रखरखाव ईशा फाउंडेशन को नाममात्र एक रुपये की लीज पर सौंपा गया है।
इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि सरकार सार्वजनिक धन से बनी सुविधाओं का निजीकरण कर रही है और अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था को महंगा बना दिया गया है। वहीं, ईशा फाउंडेशन का दावा है कि यह पूरी तरह सेवा आधारित मॉडल है, जिसका उद्देश्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सम्मानजनक, पारदर्शी और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। फाउंडेशन का कहना है कि अत्याधुनिक सुविधाओं, प्रशिक्षित स्टाफ और उच्च रखरखाव लागत के कारण शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि गरीब परिवारों के लिए भविष्य में मुफ्त सुविधा देने की योजना पर भी काम चल रहा है।
करोड़ो में बना बिहार का सबसे हाईटेक शवदाह गृह
आपको बता दें कि ईशा फाउंडेशन की ओर से बताया गया है कि इस शवदाह गृह में कई अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यहां लोगों को बैठने के लिए (AC) वेटिंग रूम का निर्माण किया गया है। यहां कई स्टाफ हैं और शवदाह गृह के मेंटेनेंस का खर्च बहुत अधिक है। इसलिए एक ही शुल्क निर्धारीत किया गया है। जो अन्य शवदाह गृहों में इतनी हाईटेक और पर्यावरण के अनुकूल सुविधाएं नहीं रहती हैं।
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ईशा फाउंडेशन की ओर से पूरी तरह से प्रशिक्षित स्वयं सेवकों की तैनाती भी की गई है, जो मृतकों के शोक-संतप्त परिजनों को सांत्वना देकर फिर से जीवन के प्रति आस पैदा कराने से लेकर हर स्तर पर उनको मदद प्रदान करने का काम करते हैं। बता दें कि स्वयं सेवक मूल रूप तमिलनाडु के रहने वाले हैं। कई लोग तो इंजीनियर की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर ईशा फाउंडेशन से जुड़कर यहां लोगों की सेवा करने का काम रहे हैं।
गैस से चलने वाला फर्नेंस को किया जाएगा शुरू
बता दें कि इस ऐतिहासिक बांस घाट में मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए लकड़ी आधारित 6, बिजली से चलने वाले 4 फर्नेंस और 8 खुले स्थान बनाए गएं हैं। आगामी 15 दिनों में अंतिम संस्कार के लिए गैस से चलने वाले खास तरह के फर्नेंस तैयार हो जाएंगे, जिसमें आसानी से शवदाह किया जा सकता है। तो वहीं अन्य सभी माध्यमों से कम लागत वाला है और इससे प्रदूषण भी कम होता है।
फिलहाल यहां शवदाह में आने वाला लगभग खर्च 3500 रुपये के अलावा 500 रुपये डोम राजा का, 500 रुपये पंडित जी और 250 रुपये नाई का शुल्क निर्धारीत किया गया है, इसके आलावा आपको कोई भी पैसा देना नहीं पड़ेगा। वहीं, लकड़ी से अंतिम संस्कार कराने की स्थिति में लड़की की कीमत अलग से शामिल होती है।
गरीबों के लिए मुफ्त सुविधा देने की तैयारी का दावा
गौरतलब है कि ईशा फाउंडेशन की शमशान घाटों के केयरटेकर का काम बीते 15 वर्षों से करते आ रहा है। इतना ही नहीं वह अकेले तमिलनाडु में 33 से अधिक शवदाह गृहों का संचालन संस्थान करने का काम रही है। इस समयावधि में सवा लाख से अधिक मृत शरीर का अंतिम संस्कार इन आधुनिक तरीके से बने संचालित शवदाह गृहों में किया जा चुका है।
तो वहीं गरीबी रेखा से नीचे जीवन जिने करने वाले व्यक्तियों के लिए अंतिम संस्कार की सेवा पूरी तरह से नि:शुल्क रखी गई है। इस फाउंडेशन के पदाधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में बिहार में भी यह सुविधा गरीबों को मुफ्त में दी जाएगी।
अंतिम संस्कार शुल्क को लेकर विपक्ष ने घेरा
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता चितरंजन गगन ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार अब लाशों से समझौता करने पे उतर गई है। जनता की पैसे से बना श्मशान घाट को अब तमिलनाडु के एनजीओ को सौप दिया गया है। वह भी मात्र एक रुपये में। वह एनजीओ सेवा के नाम पर मनमाने ढंग से पैसे वसूलने का काम कर रही है। बेईमानों और अपराधियों की लुटेरी चंदा चोर पार्टी भाजपा की एनडीए सरकार बिहारियों वासियों के जिंदा रहते हुए ही नहीं बल्कि मरने पर भी आपके परिजनों की जेब काटेने का काम करेगी।
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1 रुपये की लीज पर ईशा फाउंडेशन को सौंपने पर विवाद
RJD के प्रवक्ता ने आगे कहा कि श्मशान घाट को जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन को मात्र एक रुपये की लीज पर दे दिया गया है। इतना हि नहीं बिहार में तमिलनाडु की इस प्राइवेट संस्था को ऐसे घाट सौंपे जायेंगे। यहां अंतिम संस्कार के लिए अब न्यूनतम 3500 रुपये देने पड़ते है जबकि वहीं पास के सरकारी श्मशान घाट में सिर्फ 300 रुपये देने पड़ते हैं। चंदा चोर भाजपा की सरकार ने आपके मेहनत के पैसे से बनी सुविधाओं को निजी लोगों के हाथों में सौंपना प्रारंभ कर दिया है।
