बिहार में पिछले दरवाजे से आ गई NRC! ओवैसी बोले- सीमांचल की शक्ति छीनना क्यों...

बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा राज्य में कराए जा रहे वोटर लिस्ट रिवीजन को ओवैसी ने NRC बताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के पास नागरकिता तय करने का अधिकार नहीं है तो ऐसा क्यों कर रहे हो?
बिहार में पिछले दरवाजे से आ गई NRC! ओवैसी बोले- सीमांचल की शक्ति छीनना क्यों...
असदुद्दीन ओवैसी (फोटो-सोशल मीडिया)
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पटनाः बिहार चुनाव से पहले स्पेशल वोटर लिस्ट रिवीजन से सभी विपक्षी दल खफा हैं। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को पिछले दिनों कपिल सिब्बल ने NRC का दूसरा रूप बताया था। अब AIMIM सांसद ओवैसी ने भी SIR को पिछले दरवाजे से लाई जाने वाली NRC करार दिया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष ने सोमवार चुनाव आयोग पर अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया।

ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग को नागरिकता निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक संवैधानिक संस्था कोई बयान नहीं दे रही है और सूत्रों के माध्यम से बातें सामने आ रही हैं। ये सूत्र कौन हैं? चुनाव आयोग को यह निर्धारित करने का अधिकार किसने दिया कि कोई नागरिक है या नहीं? हमारी पार्टी ने सबसे पहले कहा था कि एसआईआर पिछले दरवाजे से एनआरसी है।

'सीमांचल को शक्तिहीन क्यों बनाना चाहते हो?'

सांसद ने कहा कि अपने पार्टी सदस्यों को बीएलओ (ब्लॉक स्तरीय अधिकारी) से मिलने के लिए कहा जाएगा। एसआईआर 2003 में आयोजित किया गया था। उस समय कितने विदेशी नागरिकों का खुलासा हुआ था? उन्होंने आगे कहा कि उन्हें (चुनाव आयोग को) (नागरिकता निर्धारित करने का) अधिकार नहीं है। गृह मंत्रालय, एसपी बॉर्डर को अधिकार है। अगर उन्हें अधिकार नहीं है तो वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। इसीलिए मैंने कहा था कि यह पिछले दरवाजे से एनआरसी है। नवंबर में बिहार में चुनाव हैं। वे सीमांचल के लोगों को शक्तिहीन क्यों बनाना चाहते हैं?"

सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को जारी रखने की अनुमति देते हुए आधार, राशन कार्ड और मतदाता फोटो पहचान पत्रों को मतदाता पहचान साबित करने के लिए स्वीकार्य दस्तावेज़ों के रूप में अनुमति देने पर विचार करने की सलाह दी थी। एसआईआर का यह फैसला बिहार चुनाव से पहले आया है, जो इस साल के अंत में होने की उम्मीद है।

बिहार में तीन सियासी फ्रंट करेंगे शक्ति प्रदर्शन

इस साल भाजपा, जद(यू) और लोजपा से मिलकर बना एनडीए बिहार में एक और जनादेश हासिल करने की कोशिश करेगा। वहीं राजद, कांग्रेस और वामपंथी दलों से मिलकर बना इंडिया ब्लॉक नीतीश कुमार सरकार को हटाने की कोशिश करेगा। इस सब के अलावा जन सुराज पार्टी भी तीसरे फ्रंट के रूप में सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है।

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