मनोज तिवारी और नीतीश कुमार
पटना : आज यानी शुक्रवार, 2 मई को जैसे ही दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज तिवारी पटना पहुंचे, उन्होंने एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही एक के बाद एक तीखे और साफ संदेश देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बड़ा बयान दे दिया। उन्होंने महागठबंधन के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि एनडीए में नीतीश कुमार की उपेक्षा हो रही है।
मनोज तिवारी ने कहा, “नीतीश कुमार को न तो कभी किनारे किया गया और न ही कोई ताकत उन्हें हाशिए पर कर सकती है। वे एनडीए के अहम स्तंभ हैं और हमेशा रहेंगे।”
जातिगत जनगणना को लेकर चल रही राजनीति पर भी मनोज तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए फैसले नहीं लेते, बल्कि जनभावनाओं को समझते हैं और उसी के अनुरूप कार्य करते हैं। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने जनता की भावनाओं को समझा और इसी वजह से जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लिया गया है।”
बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और लालू यादव इसे अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रहे हैं। लालू यादव ने तो यहां तक कहा कि ‘हम संघियों को अपने एजेंडे पर नचाते रहेंगे।’
इस पर तीखा हमला करते हुए मनोज तिवारी ने कहा, “श्रेय उसे मिलना चाहिए जो सत्ता में रहते हुए काम करे। लालू जी 15 साल बिहार की सत्ता में रहे, केंद्र में भी रहे, तब क्यों नहीं कराया जातिगत जनगणना?”
मनोज तिवारी ने कहा कि मोदी जी मुद्दों पर राजनीति नहीं करते, वे जनभावनाओं का सम्मान करते हैं। इसी वजह से आज बिहार का हर बच्चा उनके साथ है। उन्होंने आगे कहा कि महागठबंधन का मकसद बिहार को संवारना नहीं है, बल्कि सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करना है। उन्होंने ऐलान किया कि पटना मेट्रो एक साल में शुरू होने वाली है और ये एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
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अपने बयान के अंत में मनोज तिवारी ने कहा कि विपक्ष का काम केवल रोना और आरोप लगाना है। बिहार को सजाने-संवारने का सपना एनडीए देखता है, ना कि महागठबंधन। विपक्ष केवल बयानबाजी कर वोट बैंक साधना चाहता है, लेकिन बिहार की जनता अब जाग चुकी है।