कल्याणपुर विधानसभा: जदयू का यह अभेद्य किला! NDA की मजबूती विरोधियों के लिए बड़ी चुनौती
Bihar Assembly Elections: कल्याणपुर की राजनीतिक यात्रा 1967 में शुरू हुई थी। शुरुआती दशकों में यहां कोइरी जाति का वर्चस्व साफ दिखता था। यह सीट पहले सामान्य श्रेणी की थी, बाद में आरक्षित हो गया।
- Written By: मनोज आर्या
बिहार विधानसभा चुनाव, 2025, (कॉन्सेप्ट फोटो
Kalyanpur Assembly Constituency: बिहार के समस्तीपुर जिले में स्थित कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र की पहचान यहां की राजनीति से ज़्यादा पूसा में स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ी है। यह विश्वविद्यालय सिर्फ वैज्ञानिकों को तैयार नहीं करता, बल्कि खेती को एक लाभदायक व्यवसाय बनाने की नींव रखता है। यहां पूसा राइस डीएसटी-1 जैसी उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जिन्हें कम पानी और कम उर्वरक की आवश्यकता होती है। यह विश्वविद्यालय कल्याणपुर और आसपास के खेतों में नई कृषि तकनीकों का ट्रायल करता है। किसानों को आधुनिक तकनीक, मृदा स्वास्थ्य और कीट नियंत्रण की ट्रेनिंग देने के साथ-साथ उन्नत बीजों की आपूर्ति और जैविक खेती को बढ़ावा देता है। इसी कारण, यहां के किसान हर मौसम में प्रगति कर रहे हैं।
खेती के साथ-साथ, पशुपालन और डेयरी उद्योग भी स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ हैं, जो लोगों की अच्छी-खासी आमदनी का स्रोत है। समस्तीपुर मुख्यालय (12 किमी दूर) यहाँ की कृषि उपज के लिए मुख्य बाजार है, जबकि दलसिंहसराय, रोसड़ा और दरभंगा जैसे बाजार भी किसानों की पहुंच में हैं।
राजनीतिक सफर: सामान्य से आरक्षित सीट तक का बदलावट
कल्याणपुर की राजनीतिक यात्रा 1967 में शुरू हुई थी। शुरुआती दशकों में यहाँ कोइरी जाति का वर्चस्व साफ दिखता था। यह सीट पहले सामान्य श्रेणी की थी, लेकिन 2008 में परिसीमन आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इस सीट को अनुसूचित जातियों (SC) के लिए आरक्षित कर दिया। यह आरक्षण एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। 2010 के बाद से, चुनाव परिणामों पर अनुसूचित जाति के मतदाताओं का असर स्पष्ट रूप से दिखने लगा, जिसका सीधा लाभ जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू को मिला।
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जदयू का लगातार वर्चस्व
कल्याणपुर ने कुल 16 विधानसभा चुनाव देखे हैं। चुनावी इतिहास में जदयू की मजबूत पकड़ रही है। जदयू की सफलता का रिकॉर्ड देखा जाए तो जदयू ने (2000 की समता पार्टी भी) 6 बार जीत हासिल की है। वहीं अन्य दलों में कांग्रेस को 3 बार और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी व राजद को 2-2 बार सफलता मिली है। हालांकि, 2010 में सीट आरक्षित होने के बाद से जदयू की जीत का सिलसिला लगातार जारी रहा है। उसने 2013 के उपचुनाव भी जीत हासिल की।
महेश्वर हजारी का एक दशक का दबदबा कायम
कल्याणपुर के चुनावी इतिहास में महेश्वर हजारी का नाम पिछले एक दशक से मजबूती से जुड़ा हुआ है। उन्होंने लगातार दो बार इस सुरक्षित सीट पर जदयू का परचम लहराया है। 2015 के मुकाबले में महेश्वर हजारी ने लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के प्रिंस राज को बड़ी चुनौती दी थी। हजारी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 50.40% वोट शेयर के साथ 84,904 वोट हासिल किए और प्रिंस राज (28.03% वोट) को 37,686 वोटों के भारी अंतर से हराया। वहीं 2020 में भी करीबी संघर्ष देखने को मिला।
2020 के चुनावों में महेश्वर हजारी ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिब्रेशन) के उम्मीदवार रंजीत कुमार राम को कांटे के मुकाबले में हरा दिया था। इसमें जदयू उम्मीदवार हजारी ने 10,251 वोटों के अंतर से जीत दर्ज करके अपनी सीट बरकरार रखी।
बदलते समीकरण का फायदा किसको मिलेगा
नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में इस सुरक्षित सीट पर जदयू को कड़ा मुकाबला मिलने की उम्मीद है, लेकिन राजनीतिक समीकरण इस बार बदले हुए हैं। पारंपरिक रूप से लोजपा इस सीट पर जदयू की मुख्य प्रतिद्वंदी रही है। अब जबकि लोजपा (रामविलास) वापस एनडीए के पाले में आ चुकी है, इसका सीधा फायदा गठबंधन को मिल सकता है।
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माना जा रहा है कि विरोधी वोटों का बिखराव अब कम हो सकता है, जिससे एनडीए की स्थिति मजबूत हो सकती है। इसका स्पष्ट संकेत 2024 के लोकसभा चुनाव में मिला था, जब एनडीए की उम्मीदवार शंभवी चौधरी ने समस्तीपुर संसदीय सीट के कल्याणपुर विधानसभा खंड में 34,228 मतों की बड़ी बढ़त हासिल की थी। यह बढ़त बताती है कि इस बार जदयू के गढ़ को तोड़ना विरोधियों के लिए आसान नहीं होगा।
