

पटनाः राजद नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर भाजपा नेत्री पर वोटर लिस्ट रिवीजन को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। अब इस वीडियो पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया आ गई है। चुनाव आयोग ने दरभंगा से जुड़े एक वीडियो पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
वीडियो में भाजपा की महिला नेता कविता कुमारी उर्फ सपना भारती को एक मतदान केंद्र पर देखा गया, जहां एसआईआर का कार्य चल रहा था। वीडियो बनाने वाले राजनैतिक कार्यकर्ता जमाल हसन ने आरोप लगाया कि कविता कुमारी मतदाता सूची में हेरफेर कराने की कोशिश कर रही थीं।
वीडियो में भाजपा नेत्री बीएलओ के साथ दिखी
वीडियो बनाने वाले शख्स ने दावा किया कि बीएलओ (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) मतदाताओं के घर नहीं जा रहे हैं, बल्कि लोगों को दूसरी जगह बुलाया गया है और भाजपा की नेता वोटर्स को परेशान कर रही हैं। इस वीडियो में सुना ज सकता है कि एक युवक महिला से बातचीत कर रहा है। जिसमें युवक कहता है कि बीएलओ अपना काम कर लेंगे, यहां आपका काम है। इसके अलावा युवक बताता है कि महिला भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष है। इस वीडियो को तेजस्वी यादव ने भी अपने सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किया है।
तेजस्वी ने सवाल उठाते हुए कहा, "चुनाव आयोग किस निष्पक्षता की बात करता है? क्या इस घटना के बाद माना जाए कि चुनाव आयोग सही से काम कर रहा है?" जमाल हसन ने आरोप लगाए कि उन्हें चुनाव आयोग पर हर तरीके से शक है।
कांग्रेस और राजद ने भी वीडियो किया शेयर
इस वीडियो को कांग्रेस और राजद के अन्य नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वीडियो में किए गए दावे निराधार और भ्रामक हैं। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा कराई गई जांच में सामने आया कि कविता कुमारी मतदान केंद्र पर अपने और अपने परिवार के सदस्यों का गणना प्रपत्र और आवश्यक दस्तावेज जमा कराने गई थीं। वे केवल अपना फॉर्म भर रही थीं और कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
चुनाव ने आरोप को बेबुनियाद बताया
चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि कविता कुमारी और वीडियो बनाने वाले जमाल हसन के बीच पूर्व से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। इसी कारण जमाल हसन ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि बीएलओ द्वारा कोई लापरवाही नहीं बरती गई और लगाए गए पक्षपात के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
-इनपुट IANS