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Bihar Rajya Sabha Chunav: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है। एनडीए की तरफ से चार उम्मीदवारों का राज्यसभा जाना पहले से ही तय है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए महागठबंधन की तरफ से भी उम्मीदवार उतारे जाने के चलते राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है।
इस पांचवीं सीट पर जीत दर्ज करने के लिए एनडीए उम्मीदवार को 3 वोटों की दरकार है, जबकि महागठबंधन उम्मीदवार को 6 वोट चाहिए होंगे। बिहार विधानसभा में चल रही वोटिंग के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने राज्य में सियासी हड़कंप मचा दिया है।
जेडीयू कोटे के मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि NDA के सभी 202 विधायकों ने अपने वोट डाल दिए हैं। वहीं, महागठबंधन के चार विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इनमें ढाका से आरजेडी विधायक फैसल रहमान और मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद, वाल्मीकि नगर से सुरेंद्र कुशवाहा और फोर्ब्सगंज से मनोज विश्वास शामिल हैं।
कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास से संपर्क नहीं हो पा रहा है। दोनों के फोन बंद आ रहे हैं। कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद विधानसभा पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक अपना वोट नहीं डाला है। दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल के विधायक फैसल रहमान अभी तक विधानसभा नहीं पहुंचे हैं और उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।
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महागठबंधन को अपना उम्मीदवार जिताने के लिए बाहर से 6 वोट हासिल करने थे। इसके लिए तेजस्वी यादव ने AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल ईमान से मुलाकात की थी। AIMIM के बिहार में पांच विधायक हैं। वहीं, 6वें वोट के लिए बसपा के इकलौते विधायक पर निगाहें थीं।
महागठबंधन उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह उर्फ एडी सिंह के जीतने का दावा कर रहा था। तेजस्वी को इस बात का भरोसा था कि AIMIM के पांच और बसपा का एक विधायक महागठबंधन का समर्थन करेगा, लेकिन अपने ही विधायकों के ‘नॉट रीचेबल’ होने से मामला उलटा हो गया है।
जिस तरह से तीन विधायक लापता हैं और एक ने वोट नहीं किया उससे जहां महागठबंधन प्रत्याशी की हार तय है, तो वहीं सत्ताधारी NDA के भी पांचवें उम्मीदवार की जीत पर संशय बना हुआ है। ऐसे में अब वोटिंग खत्म होने और चुनाव के नतीजे सामने आने का इंतजार है।